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आधी रात सरकारी घर खाली कर ‘लापता’ हुए PCS अलंकार अग्निहोत्री, बिना चार्ज हैंडओवर दिए छोड़ा शहर

आधी रात सरकारी घर खाली कर ‘लापता’ हुए PCS अलंकार अग्निहोत्री, बिना चार्ज हैंडओवर दिए छोड़ा शहर

Alankar Agnihotri Suspension: उत्तर प्रदेश के चर्चित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का प्रकरण अब और गहरा गया है। इस्तीफा देने और सरकार द्वारा निलंबित किए जाने के बाद, उन्होंने आधी रात को अपना सरकारी आवास खाली कर दिया और बिना किसी को चार्ज सौंपे शहर छोड़कर चले गए हैं। वर्तमान में उनके ठिकाने के बारे में प्रशासन और आम जनता को कोई जानकारी नहीं है।

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात करीब 12:30 बजे अपने सरकारी आवास से अपना अधिकांश सामान निकलवाया। तमाम चर्चाओं की मानें तो, सामान गाड़ी में लदवाने के बाद वे खुद भी कार में बैठकर कहीं चले गए। चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने विधिवत रूप से अपना चार्ज हैंडओवर भी नहीं किया है, जबकि प्रशासनिक नियमों के अनुसार उन्हें यह औपचारिकता पूरी करने के लिए शहर में रुकना चाहिए था। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वे आखिर कहां हैं।

आईआईटी स्नातक से पीसीएस तक का सफर

अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने आईआईटी बीएचयू से बीटेक किया था और लगभग 10 साल तक आईटी सेक्टर में काम किया था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में उल्लेख किया कि वे महामना मदन मोहन मालवीय के आदर्शों से प्रेरित होकर जनता की सेवा में आए थे। हालांकि, हालिया घटनाक्रमों ने उनके करियर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं क्योंकि सरकार ने उनके बयानों के बाद उन्हें निलंबित (Suspend) कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

इस्तीफे के पीछे ‘यूजीसी’ और ‘शंकराचार्य’ विवाद

अलंकार ने अपने पांच पन्नों के पत्र में कई गंभीर सामाजिक और धार्मिक मुद्दे उठाए थे। उन्होंने मुख्य रूप से दो कारणों से इस्तीफा दिया:

यूजीसी के नए नियम: उनका आरोप है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग (सवर्ण) के छात्रों के भविष्य के लिए खतरा हैं और उन्हें अपराधी की तरह देखा जा रहा है।
शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज माघ मेले में के शिष्यों की चोटी खींचे जाने की घटना से वे बेहद आहत थे। उन्होंने इसे ब्राह्मणों और साधु-संतों की सांस्कृतिक पहचान का अपमान बताया।

अग्निहोत्री ने लगाए गंभीर आरोप

अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर सनसनीखेज आरोप लगाए कि उन्हें DM आवास पर करीब 45 मिनट तक जबरन बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने दावा किया कि उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और लखनऊ से आए एक फोन कॉल में उनके ब्राह्मण होने को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गई। पत्र में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ब्यूरोक्रेसी में उच्च अधिकारी किसी ‘बाबा’ के घर जाकर रोटियां सेंकते हैं, जो कि प्रशासनिक गरिमा के खिलाफ है।

प्रशासन का पलटवार: ‘मिठाई खिलाई और कॉफी पिलाई, दबाव नहीं बनाया’

सिटी मजिस्ट्रेट के इन आरोपों को जिला प्रशासन ने पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह के अनुसार, को केवल सामान्य प्रशासनिक चर्चा के लिए बुलाया गया था। प्रशासन का कहना है कि उस बैठक में एसएसपी और अन्य एडीएम भी मौजूद थे, जहां उन्हें केवल उनके करियर और स्थिति के बारे में समझाने की कोशिश की जा रही थी। एडीएम ने स्पष्ट किया कि उन्हें वहां ससम्मान चाय, कॉफी और मिठाई दी गई थी और बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं थी।

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