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तंत्र-मंत्र और सट्टे का खेल; साधु नरेशनाथ पर दो दोस्तों को जहर का इंजेक्शन देकर जिंदा दफनाने..?​​​​

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद खौफनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने अंधविश्वास और इंसानियत के रिश्ते को झकझोर कर रख दिया है। सिंगौली तगा गांव के रहने वाले दिव्यांग अंकित प्रजापति और उनके पेंटर दोस्त इसरार की हत्या के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी एक पाखंडी साधु नरेशनाथ निकला है, जो तंत्र-मंत्र और सट्टे के कारोबार के जरिए अपना साम्राज्य बढ़ा रहा था।

18 दिन की तलाश के बाद दो किलोमीटर दूर मिले शव

बागपत के सिंगौली तगा गांव निवासी दिव्यांग अंकित 28 और उसका दोस्त इसरार 32 पिछले 25 जुलाई से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता थे। दोनों दोस्त एक ही बाइक पर सवार होकर रटौल के लिए निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने जब चांदीनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, तो आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजन और ग्रामीण दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश, मेरठ और बुलंदशहर समेत करीब 200 किलोमीटर तक दोनों की तलाश करते रहे। आखिरकार पुलिस की मोबाइल सीडीआर (CDR) लोकेशन के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी, तो दोनों के शव उनके घर से महज दो किलोमीटर दूर रटौल मार्ग स्थित श्रीगणेश मंदिर (लहचौड़ा) परिसर में दबे मिले। पुलिस ने चार फीट गहरे गड्ढे की खुदाई कर दोनों के क्षत-विक्षप्त शव बाहर निकाले।

साधु नरेशनाथ के काले कारनामे और तंत्र-मंत्र का साम्राज्य

पुलिस पूछताछ और गिरफ्तार आरोपियों के खुलासे के अनुसार, मुख्य आरोपी साधु नरेशनाथ (जो पहले कुंडेश्वरी, उत्तराखंड में मेहनत-मजदूरी करता था) कुछ समय पहले सिंगौली तगा के मंदिर में रहने आया था।

  • तंत्र-मंत्र का झांसा:
    आरोपी ने तंत्र क्रिया और सट्टे के नंबरों का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया था। दिल्ली और हरियाणा तक के लोग उसके पास सट्टे के नंबर लेने आते थे।
  • पहचान छिपाकर राजनीति की तैयारी:
    साधु ने अपनी पहचान छिपाकर और आधार कार्ड में पता बदलवाकर सिंगौली तगा गांव से चुनाव लड़ने की भी तैयारी शुरू कर दी थी। वह खुद को अविवाहित और ब्राह्मण कुल का बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे।

अनैतिक संबंधों का विरोध करने पर रची गई खौफनाक साजिश

पुलिस जांच में सामने आया है कि अंकित की बहन के साथ साधु नरेशनाथ के अनैतिक संबंध थे, जिसका मृतक अंकित लगातार विरोध करता था। इसी रंजिश के चलते 25 जुलाई को जब अंकित और इसरार मंदिर पहुंचे, तो साधु नरेशनाथ, उसके शिष्य उज्ज्वल, कृष्णा यादव और एक अन्य नाबालिग ने मिलकर साजिश रची।

आरोपियों ने दोनों दोस्तों को चाय में नशीली गोलियां मिलाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद उन्हें जहर के इंजेक्शन दिए गए और मंदिर परिसर में ही जिंदा दफना दिया गया। इसरार की बाइक को मवीकलां-सांकरौद के पास यमुना नदी में फेंक दिया गया था। सबसे डरावनी बात यह है कि हत्या के बाद जिस जगह दोनों के शव दबे थे, साधु ठीक उसी के ऊपर धूनी रमाकर 14 दिन तक आराम से पूजा करता रहा।

पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी के शिष्य उज्ज्वल और कृष्णा यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी साधु नरेशनाथ अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश तेजी से की जा रही है। वहीं, गाजियाबाद से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और जिला अस्पताल के चिकित्सकों की टीम द्वारा दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन मौत के असल कारणों की पुष्टि न होने के कारण बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है, जिसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल है।

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