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महिंद्रा से लेकर मारुति तक, ऑटो कंपनियों के शेयर हुए धड़ाम…ये है वजह

महिंद्रा से लेकर मारुति तक, ऑटो कंपनियों के शेयर हुए धड़ाम...ये है वजह

शेयर बाजार Image Credit source: ChatGPT

भारत की टॉप कार बनाने वाली कंपनियों जैसे महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और हुंडई के शेयर मंगलवार को 5% तक गिर गए. ऐसा इस आशंका की वजह से हुआ कि इंडिया-EU FTA, जिस पर दिन में बाद में साइन होने वाले हैं, उसमें यूरोप से आने वाली कारों पर टैक्स कम किए जा सकते हैं. महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 5.1% तक गिरकर अगस्त 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए, जिससे निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जो 2.2% टूट गया. हुंडई मोटर इंडिया के शेयर 4.5% गिरे, जबकि मारुति सुजुकी इंडिया के शेयर 3% तक नीचे आए और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की वैल्यू में 2% की गिरावट दर्ज की गई.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत यूरोपीय संघ से कारों के इंपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 40% करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि दोनों पक्ष एक फ्री ट्रेड समझौते के बेहद करीब हैं, जिसे मंगलवार को ही अंतिम रूप दिया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने 15,000 यूरो ($17,739) से ज्यादा कीमत वाली सीमित संख्या में आने वाली कारों पर टैक्स तुरंत घटाने पर सहमति जताई है. कम इंपोर्ट टैक्स से फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट और स्टेलेंटिस जैसी यूरोपीय कार कंपनियों के साथ-साथ लग्जरी ब्रांड मर्सिडीज-बेंज और BMW को फायदा मिलेगा. भारतीय कंपनियां लंबे समय से इस तरह की टैक्स कटौती का विरोध करती आई हैं. उनका कहना है कि इससे बाहर से आने वाली गाड़ियां ज्यादा सस्ती और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी, जिससे देश में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश पर असर पड़ेगा.

यूरोपीय कंपनियों का मार्केट

फिलहाल यूरोपीय कार कंपनियों की भारत के सालाना 4.4 मिलियन यूनिट के कार बाजार में हिस्सेदारी 4% से भी कम है. इस बाजार पर जापान की सुजुकी मोटर के साथ-साथ घरेलू ब्रांड महिंद्रा और टाटा का दबदबा है, जिनकी कुल हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है. एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का कहना है कि अगर इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, इंडिया-UK FTA जैसा ही रहता है, तो ड्यूटी में बदलाव का भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) कंपनियों पर बहुत कम या लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा. इसकी वजह यह है कि CBU यानी पूरी तरह बनी हुई इंपोर्टेड गाड़ियां आमतौर पर 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये कीमत वाले सुपर लग्जरी मॉडल तक ही सीमित रहती हैं. BMW, मर्सिडीज और ऑडी जैसे प्रीमियम कार निर्माता पहले से ही भारत में अपने 70% से ज्यादा वाहनों की असेंबली यहां करते हैं.

एमके ग्लोबल ने कहा कि भारत से यूरोपीय संघ में मोटरसाइकिलों पर लगने वाली करीब 8% इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती बजाज ऑटो (KTM और Triumph) और TVS मोटर (BMW और Norton) जैसे बड़े टू-व्हीलर एक्सपोर्टर्स के लिए एक सकारात्मक खबर होगी. इसकी वजह यह है कि यूरोप में बाइक की कीमत और टैक्स पर देश-देश के हिसाब से VAT भी लगाया जाता है, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है.

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