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अमेरिका और कनाडा के बीच आखिरी वक्त में हुई बड़ी डील, ट्रंप ने टाला 50% टैरिफ का फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को बड़ी राहत देते हुए उस पर लगने वाले 50 फीसदी टैरिफ को फिलहाल टाल दिया है. यह भारीभरकम टैक्स 20 अगस्त की सुबह से लागू होने वाला था, लेकिन आखिरी वक्त में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता हो गया है. ट्रंप ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस डील की पुष्टि की.

आखिरी मिनट में कैसे बनी बात

अमेरिका और कनाडा के बीच इस समझौते को लेकर बुधवार दोपहर 12:01 बजे की डेडलाइन तय की गई थी. अगर यह समय सीमा पार हो जाती, तो हॉकी स्टिक से लेकर टंग डिप्रेसर जैसे करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई उत्पादों पर 50 फीसदी टैक्स लग जाता. इस कड़े कदम से बचने के लिए वाशिंगटन और ओटावा के बीच लगातार बातचीत का दौर चला.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर लंबी चर्चा हुई. मंगलवार दोपहर को भी दोनों नेताओं ने बात की. सोमवार को ही प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट कर दिया था कि यह बातचीत बेहद नाजुक दौर में है और फिलहाल सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. आखिरकार यह कूटनीतिक प्रयास सफल रहा. ट्रंप ने अगले तीन दिनों के लिए टैरिफ पर रोक लगा दी है, ताकि जरूरी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा सके.

क्या है इस नई डील में खास

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के मुताबिक, इस नए समझौते से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होने वाला है. इसमें सभी अमेरिकी सामानों के लिए कनाडाई बाजार तक व्यापक पहुंच, आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल ट्रेड जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं. इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार, वहां के कामगारों और कनाडाई सहयोगियों के हितों की रक्षा करना है. वहीं, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि इस समझौते के बाद ‘कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन’ प्रोजेक्ट को भी दोबारा शुरू किया जा सकता है, जिसे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने काफी पहले ही बंद करवा दिया था.

दशकों पुराने विवादों का क्या होगा

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं. दोनों देश दशकों से सॉफ्टवुड लकड़ी के आयात से लेकर कनाडा के सुरक्षित डेयरी बाजार में अमेरिका की पहुंच जैसे मुद्दों पर एकदूसरे से उलझते रहे हैं. हालांकि, इन मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के आपसी संबंध काफी मजबूत हैं. करीब 5,525 मील लंबी बिना किसी पहरे वाली सीमा से हर दिन लगभग 3,30,000 लोग और 2 अरब डॉलर का माल गुजरता है. इसके अलावा 8 लाख कनाडाई नागरिक भी अमेरिका में रहते हैं. ट्रंप लंबे समय से मैन्युफैक्चरिंग को वापस अमेरिका लाने के लिए टैरिफ को हथियार बनाते रहे हैं. यहां तक कि दबाव बनाने के लिए उन्होंने कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी भड़काऊ टिप्पणियां भी की हैं.

ट्रंप का पुराना टैरिफ प्लान

अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को अपनी आर्थिक नीतियों का मुख्य केंद्र बना लिया है. पिछले साल ही उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हुए लगभग हर देश पर भारी टैक्स थोप दिया था. हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस कदम को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उन्होंने अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है. इस फैसले के बाद संघीय सरकार को आयातकों का पैसा रिफंड करना पड़ा था. लेकिन ट्रंप यहीं नहीं रुके. स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने पिछले महीने ही 59 देशों सहित यूरोपीय संघ पर 10 से 12.5 फीसदी का नया आयात शुल्क लगा दिया. यह अमेरिका के कुल आयात का 99 फीसदी हिस्सा है. ट्रंप का तर्क था कि ये देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने में विफल रहे हैं.

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