IndiaMadhya Pradesh

हम सब भारतीय… यहां न कोई अगड़ा और न कोई पिछड़ा… UGC विवाद पर बोले धीरेंद्र शास्त्री

हम सब भारतीय... यहां न कोई अगड़ा और न कोई पिछड़ा... UGC विवाद पर बोले धीरेंद्र शास्त्री

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून का उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में जबरदस्त विरोध हो रहा है. सामान्य वर्ग के छात्र और संगठन इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच बाबा बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सामने आया है. उनका कहना है कि देश में असमानता और बंटवारा नहीं होना चाहिए.

मुंबई के भिवंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में यूजीसी कानून को लेकर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से संबोधन करते हुए समानता और एकता पर जोर दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी तरह की असमानता नहीं होनी चाहिए, बल्कि समानता ही देश की पहचान होनी चाहिए.

‘एकता और अखंडता बनाए रखना ही राष्ट्र धर्म’

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत में न कोई अगड़ा हो और न कोई पिछड़ा, यहां केवल भारतीय होने की भावना होनी चाहिए. उन्होंने भारत सरकार से भी अपील करते हुए कहा कि भारतीयों को बांटने की नहीं, बल्कि जोड़ने की आवश्यकता है. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं और हम सब हिंदू भाई-भाई हैं. उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना ही सच्चा राष्ट्र धर्म है.

UGC के नए नियम का चौतरफा विरोध

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम का सवर्ण संगठन पुरजोर विरोध कर रहा है. हिंदू सेना, करणी सेना समेत कई संगठन में नए नियम पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. इनका कहना है कि यह नियम समानता के नाम पर एकतरफा है और इससे कैंपस में डर, अविश्वास और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है. नए नियम को लेकर दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग आज यूजीसी ऑफिस का घेराव करने पहुंचे. वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी विरोध प्रदर्शन किया गया.

क्या है मामला

दरअसल यह पूरा विवाद 13 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब UGC ने प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026 लागू किया. यह नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में दिए गए ‘समानता और समावेशन’ के सिद्धांत पर आधारित है. इसका मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव की शिकायतों को रोकना और उनके समाधान के लिए एक तय व्यवस्था बनाना बताया गया है.

नए नियमों के तहत सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अब एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना अनिवार्य होगा. अभी तक यह केवल एससी और एसटी के लिए ही लागू था. नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग को भी जातिगत भेदभाव की लिस्ट में शामिल किया गया है, जिसको लेकर सबसे ज्यादा बवाल हो रहा है. सामान्य वर्ग का कहना है कि OBC को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस श्रेणी में क्यों रखा गया है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply