इटावा:- जिले में गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व पर शर्मनाक और लोकतंत्र को कलंकित करने वाली घटना सामने आई है.कोतवाली भरथना क्षेत्र के अम्बेडकर पार्क स्थित पंचायत घर परिसर में 26 जनवरी को खुलेआम शराबखोरी की गई.इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई ग्रामीण पंचायत घर परिसर में शराब पीते हुए नशे की हालत में मौजूद हैं.यह वही पंचायत घर है, जहां ग्रामीण विकास, जनहित और सरकारी योजनाओं पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन यह स्थल शराबखाने में तब्दील नजर आया.सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासन के स्पष्ट आदेश के अनुसार 26 जनवरी को जिलेभर में शराब के सभी ठेके पूरी तरह बंद रहते हैं, इसके बावजूद शराब कहां से आई—यह अपने आप में बड़ा और गंभीर सवाल है.
घटना यहीं तक सीमित नहीं रही.नशे में धुत कुछ लोगों द्वारा संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माला चढ़ाए जाने की बात भी सामने आई है.लोगों का कहना है कि नशे की हालत में अंबेडकर प्रतिमा के पास इस तरह का आचरण न केवल राष्ट्रीय पर्व का अपमान है, बल्कि संविधान और उसके निर्माता का भी घोर अपमान है.
इस कृत्य से ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत घर परिसर में इस तरह की गतिविधि बिना किसी मिलीभगत के संभव नहीं है.सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी या निगरानी आखिर कहां थी। क्या जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं, या फिर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो के आधार पर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.साथ ही यह भी जांच हो कि प्रतिबंध के बावजूद शराब की आपूर्ति कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे कृत्य आगे भी दोहराए जाते रहेंगे.
फिलहाल, यह घटना इटावा प्रशासन के लिए एक कड़ी परीक्षा बन चुकी है.अब देखना यह है कि प्रशासन केवल औपचारिकता निभाता है या वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर गणतंत्र दिवस और संविधान की गरिमा की रक्षा करता है.




