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भौंका कुत्ता तो पुलिस पहुंच गई आरोपी तक, पैंट पर मिला खून भी बना सुराग… फिर DNA ने पलट दी पूरी कहानी..

महाराष्ट्र के पुणे से हत्या के एक ऐसे मामले की कहानी सामने आई है, जिसमें पुलिस को जांच के दौरान एक स्निफर डॉग से अहम सुराग मिला। कुत्ता पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति तक ले गया और इसके बाद शक की सुई उसी पर टिक गई। इतना ही नहीं, जांच के दौरान आरोपी की पैंट पर खून के धब्बे भी मिले। पुलिस को लगा कि मामला लगभग सुलझ चुका है, लेकिन अदालत में पहुंचे तो कहानी पूरी तरह बदल गई।

मामला 1 मार्च 2024 का है। लोन रिकवरी एजेंट प्रवीण मलेकर पर घर लौटते समय जानलेवा हमला किया गया था। बाद में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या की जांच शुरू की और सुराग तलाशने के लिए स्निफर डॉग की मदद ली।

जांच के दौरान कुत्ता घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर एक कैजुअल वर्कर के घर के पास पहुंचा। कुत्ते की प्रतिक्रिया के आधार पर पुलिस ने उसे संदिग्ध मानते हुए पूछताछ शुरू की। इसके बाद जांच एजेंसियों को उसकी पैंट पर खून के धब्बे भी मिले, जिससे आरोपी पर शक और गहरा गया।

लेकिन अदालत में इन दोनों सुरागों की ताकत कम पड़ गई। बारामती की अतिरिक्त सत्र अदालत ने साफ किया कि स्निफर डॉग का किसी व्यक्ति की ओर इशारा करना या उसके पास जाकर भौंकना अपने आप में हत्या का निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। कुत्ते की प्रतिक्रिया से सिर्फ जांच को दिशा मिल सकती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उसी व्यक्ति ने हत्या की थी।

इसके बाद पैंट पर मिले खून के धब्बों की DNA जांच भी कराई गई। यहां भी अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा। जांच में इन धब्बों का मृतक के खून से कोई ठोस संबंध साबित नहीं हो सका। रिपोर्ट में खून के धब्बों से उपयोगी DNA प्रोफाइल भी हासिल नहीं हो पाई।

अदालत ने माना कि प्रवीण मलेकर की मौत हत्या थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि हत्या आरोपी ने ही की थी। अदालत ने कहा कि शक कितना भी मजबूत क्यों न हो, दोष साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत जरूरी हैं।

आखिरकार 37 वर्षीय कैजुअल वर्कर को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। इस मामले में पुलिस के हाथ दो बड़े सुराग जरूर लगे थे—एक स्निफर डॉग और दूसरा खून के धब्बे—लेकिन अदालत में दोनों ही आरोपी को हत्या से जोड़ने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुए।

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