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महात्मा विदुर के इस श्लोक को अपनाने से मिल सकता है सुखी जीवन, इन 7 बातों से रहें दूर..

महात्मा विदुर ने अपनी नीतियों में जीवन जीने के बारे और सुखी जीवन से जुड़े कई नियमों के बारे में बताया है. वह महाभारत काल में हस्तिनापुर के महामंत्री थे. वह अपनी बुद्धिमत्ता और नीतियों के लिए प्रसिद्ध थे. उस समय के उनके विचार और नीतियां आज के समय में भी प्रासांगिक साबित होती है. व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए उनके बताए इन नियमों को अपनाना चाहिए.

विदुर नीति में वर्णित प्रसिद्ध श्लोक

अनर्थकं विदेशवासं गृहेशुं। पापैः सख्यं परदाराभिमर्शनम्।
दशं स्तेयं पैशुनं मध्यपानं न सेवते यः स सुखी सदेव॥

महात्मा विदुर का यह प्रसिद्ध श्लोक महाभारत काल में वर्णित विदुर नीति का है. इस श्लोक के माध्यम से महात्मा विदुर ने लोगों को बुरे कर्मो और बुराई से दूर रहने की सलाह दी है. इस श्लोक के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सात चीजों से दुरी बनाकर रहना चाहिए. आइये इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

इन 7 बातों से रहें दूर

व्यर्थ का विदेशवास – व्यर्थ में घर-परिवार से दूर नहीं रहना चाहिए. इससे जीवन में अकेलापन और दुख आता है. घर से दूर रहना उचित नहीं होता है.

पापियों से दोस्ती – आपको अपने मित्र सोच-समझकर बनाने चाहिए. पाप करने वाले और चरित्रहीन लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए.

पराई स्त्री से संबंध – कभी भी जीवन में पराई स्त्री से संबंध नहीं रखने चाहिए. पराई स्त्री के साथ संबंध बनाने से परिवार का नाश होता है.

अपवाद – अपवाद का अर्थ है कि, दूसरों को बदनाम करने और व्यर्थ में किसी के बारे में झूठ बोलने से बचना चाहिए. इसके कारण रिश्ते कमजोर होते हैं.

चोरी करना – चोरी करने वाले इंसान को जीवन में कभी सुख नहीं मिलता है. चोरी करने से मिले धन से जीवन में परेशानियों आती हैं. हमेशा मेहनत से धन कमाना चाहिए.

चुगली करना – दूसरों की चुगली करना और इधर-उधर की बातें करके अफवाह फैलाना गलत होता है. इससे समाज में कलह पैदा होती है.

नशा और मद्यपान – नशा यानी मद्यपान करने से व्यक्ति की बुद्धि, सेहत और सम्मान का नाश होता है. इसलिए नशा करने से बचना चाहिए. शराब, सिगरेट और किसी भी नशे की लत है, तो इसे छोड़ दें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.Satyareport  इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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