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मद्रास तमिल शब्द नहीं…कैसे एक बस्ती से निकला था चेन्नई नाम? पढ़ें नाम बदलने की पूरी कहानी

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई. आज यह शहर विकास, उद्योग जगत के क्षेत्र में बेहद सम्मान से देखा जाता है. यहां लंबे समय से क्षेत्रीय दलों की सरकारें हैं लेकिन चेन्नई की भौगोलिक स्थिति उसे खास बनाती है. सरकारों ने उद्यमियों को खूब और खूब खींचा. आज यह ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का हब है. रेल कोच फैक्ट्री यहीं है, जहां आधुनिक वंदेभारत ट्रेन से लेकर पुरानी पैसेंजर ट्रेंस के डिब्बे भी बना करते हैं. इसी चेन्नई को करीब तीन दशक पहले मद्रास नाम से जाना जाता था. फिर राज्य की करुणानिधि सरकार ने जन भावनाओं का ख्याल रखते हुए इसका नाम चेन्नई रख दिया. पर, आईआईटी, हाईकोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण संस्थान मद्रास नाम को जिंदा रखे हुए हैं.

इसी मद्रास ने अपनी स्थापना के 387 साल पूरे कर लिए हैं. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि कहां से आया चेन्नई नाम? मद्रास नाम पड़ने की क्या है कहानी? और, पहले यह इलाका किनकिन नामों से जानापहचाना गया?

22 अगस्त 1639 को क्या हुआ था?

22 अगस्त 1639 को आधुनिक भारत के एक बड़े महानगर की नींव रखी गई थी. इसे दुनिया पहले मद्रास के नाम से जानती थी और आज हम इसे चेन्नई कहते हैं. नाम के बदलने के पीछे भाषा, संस्कृति, राजनीति और सदियों पुराना इतिहास जुड़ा हुआ है. ईस्ट इंडिया कंपनी के दो अंग्रेज अधिकारी फ्रांसिस डे और एंड्रयू कोगन कोरोमंडल तट पर व्यापार के लिए सुरक्षित जगह तलाश रहे थे.

मद्रास उच्च न्यायालय और आईआईटी मद्रास समेत कई संस्थान पुराने नाम के साथ काम कर रहे हैं.

उन्होंने चंद्रगिरि के विजयनगर साम्राज्य के प्रतिनिधि दमर्ला वेंकटपति नायक और उनके भाई चेन्नप्पा नायक से समुद्र किनारे की जमीन का एक छोटा सा पट्टा लिया. यह जमीन कोवम नदी और बंगाल की खाड़ी के बीच बसी एक संकरी रेतीली पट्टी थी. यहीं पर अंग्रेजों ने 1640 में सेंट जॉर्ज नाम का किला बनाया, जो भारत में अंग्रेजों का पहला स्थायी सैन्य और व्यापारिक गढ़ बना.

मद्रास नाम कहां से आया और क्या यह तमिल शब्द है?

इतिहासकार मानते हैं कि मद्रास तमिल मूल का शब्द नहीं है. इसके उद्गम को लेकर कई ऐतिहासिक मत प्रचलित हैं.

  • पहली राय यह है कि यहां पहले से एक मछुआरों का गांव था, जिसे मद्रासपट्टिनम कहा जाता था.
  • दूसरा मत इसे पुर्तगाली व्यापारियों से जोड़ता है. पुर्तगालियों ने इस इलाके को ‘माद्रे दे देउस’ नाम दिया था, जिससे धीरेधीरे बिगड़कर मद्रास बना.
  • तीसरा मत यह मानता है कि वहां एक समृद्ध ईसाई परिवार रहता था, जिसका उपनाम मदेरोस था और उन्हीं के नाम पर इस क्षेत्र को पुकारा जाने लगा.
  • एक और विचार यह भी है कि वहां एक स्थानीय इस्लामी मदरसा था, जिसके आधार पर अंग्रेजों ने इसे मद्रास कहना शुरू किया. इन सभी मतों से यह स्पष्ट होता है कि मद्रास शब्द प्राचीन तमिल भाषा या व्याकरण की परंपरा से नहीं निकला था.

भरतनाट्यम तमिलनाडु राज्य का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है.

कैसे पड़ा चेन्नई का नाम?

चेन्नई नाम का इतिहास स्थानीय शासकों और पारंपरिक बस्तियों से गहराई से जुड़ा हुआ है. जिस समय अंग्रेजों ने यह जमीन खरीदी थी, उस समय इस क्षेत्र के स्थानीय सूबेदार दमर्ला चेन्नप्पा नायक थे. दमर्ला भाइयों ने अंग्रेजों को जमीन देते समय यह इच्छा जताई थी कि किले के पास विकसित होने वाले नए शहर का नाम उनके पिता चेन्नप्पा नायक के नाम पर रखा जाए.

अंग्रेजों ने किले के उत्तर में बसी नई भारतीय बस्ती को चेन्नापट्टिनम नाम दिया. समय के साथ चेन्नापट्टिनम का संक्षिप्त रूप चेन्नई बन गया. स्थानीय तमिल आबादी हमेशा से इसे चेन्नई या चेन्नापट्टिनम के नाम से पुकारती रही, जबकि अंग्रेज और बाहरी दुनिया इसे आधिकारिक तौर पर मद्रास कहते रहे.

चेन्नई का मंडावेली जहां कई प्राचीन मंदिर हैं. फोटो: Unsplash

व्हाइट टाउन और ब्लैक टाउन के क्या थे मायने?

फोर्ट सेंट जॉर्ज के निर्माण के बाद शहर दो हिस्सों में बंट गया. किले के भीतर के क्षेत्र को व्हाइट टाउन कहा जाता था, जहां केवल यूरोपीय नागरिक रहते थे. किले के बाहर उत्तर की ओर भारतीय बुनकर, व्यापारी और कामगार बसे, जिसे अंग्रेजों ने ब्लैक टाउन नाम दिया. यही ब्लैक टाउन वास्तव में चेन्नापट्टिनम था. बाद में जॉर्ज पंचम के सम्मान में ब्लैक टाउन का नाम बदलकर जॉर्ज टाउन कर दिया गया.

स्वतंत्रता के बाद नाम बदलने की मांग क्यों उठी?

1947 में देश आजाद होने के बाद पूरे भारत में औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई. तमिलनाडु में आत्मसम्मान आंदोलन और भाषाई अस्मिता बहुत मजबूत थी. स्थानीय जनता और विद्वानों का मानना था कि मद्रास नाम अंग्रेजों और विदेशी शासकों की दासता का प्रतीक है. चूंकि, यह शब्द तमिल भाषा की जड़ों से मेल नहीं खाता था, इसलिए इसे बदलकर स्थानीय और ऐतिहासिक नाम चेन्नई करने की मांग तेज हो उठी.

एम. करुणानिधि को पुष्प अर्पित करते बेटे एमके स्टालिन. फोटो: PTI

साल 1996 में आधिकारिक रूप से मद्रास चेन्नई हुआ

वर्ष 1996 में तमिलनाडु में डीएमके की सरकार बनी और एम. करुणानिधि मुख्यमंत्री बने. सरकार ने जनता की लंबे समय से चली आ रही भावना का सम्मान करते हुए 17 जुलाई 1996 को मद्रास का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर चेन्नई कर दिया. इसके बाद 4 अगस्त 1996 को राज्य विधानसभा में इससे संबंधित प्रस्ताव पारित हुआ और केंद्र सरकार ने इसे पूरी कानूनी मान्यता दे दी.

चेन्नई के मंदिर अपनी भव्य द्रविड़ वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं. फोटो: Unsplash

मद्रास बनाम चेन्नई की सांस्कृतिक पहचान

नाम बदलने के बाद भी शहर की आत्मा में कोई कमी नहीं आई. चेन्नई आज आधुनिक उद्योगों, ऑटोमोबाइल हब और स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र है. इसे दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार और भारत की स्वास्थ्य राजधानी कहा जाता है. हालांकि, कुछ ऐतिहासिक संस्थाएं आज भी मद्रास नाम को अपनी धरोहर के रूप में संजोए हुए हैं. मद्रास उच्च न्यायालय, मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास मेडिकल कॉलेज और आईआईटी मद्रास जैसे संस्थान आज भी अपने पुराने नाम के साथ ही काम कर रहे हैं.

मद्रास दिवस का आज भी है बहुत महत्व

हर साल 22 अगस्त को शहरवासी मद्रास दिवस मनाते हैं. इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वॉक, फोटोग्राफी प्रदर्शनियां और परिचर्चाएं आयोजित की जाती हैं. यह दिन शहर के 380 से अधिक वर्षों के समृद्ध इतिहास, वास्तुकला और मिलीजुली संस्कृति को याद करने का अवसर देता है. एक छोटी सी मछुआरों की बस्ती से शुरू होकर आधुनिक महानगर बनने तक का यह सफर केवल एक नाम का बदलाव नहीं है. यह औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति पाने और अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का एक ऐतिहासिक प्रतीक है.

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