
आमतौर पर माना जाता है कि किडनी का काम केवल शरीर से अपशिष्ट पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके ब्लड शुगर लेवल को भी सीधे नियंत्रित करती है? आमतौर पर जब ब्लड शुगर की बात होती है, तो हमारा ध्यान पैंक्रियाज, इंसुलिन, खानपान और एक्सरसाइज पर जाता है, लेकिन डायबिटीज और किडनी के बीच का सीधा संबंध भी उतना ही जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज किडनी के बारीक फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा कर डायबिटिक नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। जानिए कैसे किडनी रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस प्रक्रिया के जरिए शुगर कंट्रोल करती है।
कंसल्टेंट डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने indianexpress.com को बताया है कि काश ज़्यादा लोग इस बात को समझते है कि किडनी सिर्फ वेस्ट को फिल्टर नहीं करती बल्कि रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस नाम की प्रक्रिया के ज़रिए ग्लूकोज़ को कंट्रोल करने में भी सक्रिय रूप से शामिल होती हैं, जिसमें किडनी के टिश्यू असल में ग्लूकोज़ बनाते हैं। साथ ही वे ग्लूकोज़ रीएब्ज़ॉर्प्शन के ज़रिए फ़िल्टर हुई शुगर को यूरिन में जाने देने के बजाय वापस ब्लडस्ट्रीम में ले आती हैं।
डायबिटीज और किडनी का कनेक्शन
- हाई शुगर के कारण किडनी के फिल्टरिंग यूनिट्स (Nephrons) पर दबाव बढ़ता है और वे सख्त या कठोर होने लगते हैं।
- हेल्दी किडनी खून से प्रोटीन (Albumin) को रोकने देती है, लेकिन डैमेज होने पर प्रोटीन यूरीन के जरिए बाहर निकलने लगता है।
- जब फिल्टर काम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर में पानी, नमक और टॉक्सिन जमा होने लगते हैं।
किडनी ब्लड शुगर को कैसे कंट्रोल करती है?
किडनी में Renal Gluconeogenesis नाम की प्रक्रिया होती है। इसमें किडनी का ऊतक जरूरत पड़ने पर ग्लूकोज बनाता है। खासकर जब व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता या फास्ट में होता है, तब शरीर में ब्लड ग्लूकोज बनाए रखने में यह प्रक्रिया मदद करती है। इसके अलावा किडनी खून को फिल्टर करते समय ग्लूकोज को भी फिल्टर करती है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर इस ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं जाने देता, बल्कि उसे दोबारा खून में वापस पहुंचा देता है। इसे Glucose Reabsorption यानी ग्लूकोज का पुनः अवशोषण कहा जाता है। इस प्रक्रिया में SGLT2 (Sodium-Glucose Cotransporter-2) नाम का ट्रांसपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज की कुछ दवाएं इसी SGLT2 को टारगेट करके काम करती हैं, जिससे अतिरिक्त ग्लूकोज पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकलता है।
किडनी और ब्लड शुगर का रिश्ता एकतरफा नहीं है
डायबिटीज और किडनी के बीच संबंध को आमतौर पर इस तरह समझाया जाता है कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ एक दिशा में नहीं चलता। किडनी शरीर में इंसुलिन को तोड़ने और साफ करने में भी भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है, तो इंसुलिन शरीर में ज्यादा समय तक रह सकता है। इसके अलावा किडनी की कार्यक्षमता में बदलाव ग्लूकोज के दोबारा अवशोषण और शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
इसलिए किडनी की कार्यक्षमता में शुरुआती बदलाव और ब्लड शुगर के कंट्रोल के बीच संबंध हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति में हल्की किडनी समस्या सीधे डायबिटीज का कारण बनती है। किडनी और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के बीच संबंध जटिल और कई कारकों पर निर्भर करता है।
किडनी की सेहत और ब्लड शुगर को कैसे रखें हेल्दी
किडनी और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने के लिए कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं जैसे
- रेगुलर बॉडी को एक्टिव रखें। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि डायबिटीज कंट्रोल रखती है और किडनी की सेहत भी दुरुस्त रहती है।
- खाने में अतिरिक्त नमक और ज्यादा सोडियम से बचें। नमक का कम सेवन आपकी सेहत को दुरुस्त रखता है।
- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीने की कोशिश न करें।
- ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।
- डायबिटीज या किडनी की बीमारी का जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की जांच कराते रहें।
- बहुत अधिक प्रोटीन वाली डाइट बिना जरूरत या विशेषज्ञ की सलाह के न लें, खासकर अगर किडनी की बीमारी का जोखिम हो।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज या किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद या शुरू न करें। सही जांच और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।



