
अमृत विचार : लखीमपुर खीरी में बाढ़ का पानी भले ही घटने लगा है, लेकिन किसानों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। जलस्तर घटते ही नदियों ने कटान तेज कर दिया है। धौरहरा क्षेत्र के करीब 27 गांव जलभराव से जूझ रहे हैं। वहीं, 11 गांवों में घाघरा नदी लगातार खेतिहर जमीन निगल रही है। सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि नदी में समा चुकी है और हजारों एकड़ खेत अब भी जलमग्न हैं। किसानों के चेहरे स्याह हो चुके हैं। आंखों के सामने जरजमीन नदी में समाती देखकर कलेजा छलनी हो रहा है।
पलिया, गोला और निघासन तहसील के निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि पलिया में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। बनबसा बैराज से पानी का डिस्चार्ज घटकर करीब 73 हजार क्यूसेक रह गया है। शनिवार को शारदा का जलस्तर 154.370 मीटर दर्ज किया गया। इससे बाढ़ का खतरा कुछ कम हुआ है, लेकिन प्रशासन ने निगरानी जारी रखी है।
घाघरा ने तेज किया कटान
धौरहरा के कैरातीपुरवा, बेलागढ़ी, ओझापुरवा, चपकहा, मिलिक, सियापुर और सधुवापुर समेत कई गांवों में ग्रामीण अब बाढ़ के बाद कटान की मार झेल रहे हैं। ओझापुरवा, कैरातीपुरवा, दुर्गापुर पड़री, चपकहा, चंदौली, मिलिक, डुड़की, रामलोक, जंगल सुजानपुर, गुलेरिया तालुके अमेठी और परसा में हालात गंभीर बताए जा रहे हैं।
गन्ने के खेत लील गई नदी
गोला तहसील के रामनगर कलां में शारदा नदी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। सैकड़ों एकड़ गन्ने की खड़ी फसल कटान की चपेट में आकर नदी में समा गई। किसानों के मुताबिक फसल तैयार होने में करीब चार महीने बाकी थे।
खाद, बीज, दवा और मजदूरी में लाखों रुपये खर्च करने वाले किसानों के सामने अब लागत डूबने का संकट है। कुछ किसान नाव के सहारे नदी पार जाकर बचा हुआ गन्ना काट रहे हैं और उसे पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इससे उनकी लागत का दस फीसदी भी निकलना मुश्किल है।
अफसर बोलेनजर बनाए हैं
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि धौरहरा तहसील के ईसानगर क्षेत्र के लोलैंड एरिया के कई गांवों में घाघरा का पानी भरा है। पलिया, गोला और निघासन के निचले इलाकों में भी जलभराव है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और जल्द प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
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