
जयपाल/वाराणसी: वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा इलाके से गत 6 अगस्त से लापता ईशू कन्नौजिया की उसके ही तीन दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव को 5 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक के बोरे में भरकर गोबर के गड्ढे में फेंक दिया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रदीप, उसके सगे भाई रामकृष्ण और उनके मित्र रोहित को गिरफ्तार कर लिया है.
जानिए हत्या की वजह गत 3 अगस्त को शराब पीने के दौरान ईशू ने आरोपी प्रदीप की पिटाई कर दी थी. इसी रंजिश का बदला लेने के लिए प्रदीप ने अपने भाई और दोस्त के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम 7 अगस्त की रात तीनों ने ईशू को अधिक मात्रा में शराब पिलाई. इसके बाद रोहित और रामकृष्ण ने उसके हाथ पकड़े और प्रदीप ने चापड़ से वार कर उसका गला काट दिया. पहचान छिपाने के लिए सिर और धड़ अलग कर शव के 5 टुकड़े किए गए. 6 अगस्त से लापता ईशू की 17 अगस्त को परिजनों ने सिगरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी.
यूट्यूब से सीखा तरीका मुख्य आरोपी प्रदीप ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव ठिकाने लगाने का तरीका सीखा था. पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए तीनों ने शव को प्लास्टिक के बोरे में भरा और गोबर से ढके गड्ढे में फेंक दिया.
सीडीआर और सीसीटीवी से खुलासा लापता ईशू की कॉल डिटेल (CDR) निकालने पर अंतिम कॉल प्रदीप की पाई गई. पुलिसिया पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
शव की बरामदगी शुक्रवार रात करीब 10 बजे पुलिस ने लहरतारा-छातडीह पोखरी के पास रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर में बने गोबर के गड्ढे से सड़ चुका शव बरामद किया. बोरे में गोबर भरे होने और कई दिन बीत जाने के कारण शव काफी हद तक सड़ चुका था. शव को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा स्थित मोर्चरी में रखवाया गया, सिगरा पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुटी है.
क्या कहती है पुलिस.. वैभव बांगर, ADCP, काशी जोन ने बताया कि ये सारे एक साथ शराब का सेवन कर रहे थे. प्रदीप और ईशू के बीच कहासुनी हो गई और किसी धारदार हत्या से हमला किया. पुलिस ने बताया कि शव को बरामद कर लिया गया है.तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस ने बताया कि ईशू के दोस्तों ने हत्या के बाद बड़े ही सफाई से शव को ठिकाने लगाया. ऐसी जगह चुनी जहां किसी को शंका तक न हो सके। गोबर के गड्ढे में शव को प्लास्टिक के बोरे में भरकर फेंका गया ताकि आसपास के लोगों को दुर्गंध न महसूस हो सके. रेलवे के पास शव को दफन कर दिया.



