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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर 3 गांठों का क्या है Vedic महत्व? Astrology से जानें लाभ

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि पर राखी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाईबहन के अटूट प्रेम, विश्वास का पवित्र प्रतीक है।
इस दिन बहनें अपने भाई कलाई पर राखी बांधती है और माथे पर तिलक लगाती हैं। वहीं, बहनें अपने भाई की लंबी आयु और सुखसमृद्धि की प्रभु से कामना करती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधते समय हमेशा तीन गांठे क्यों लगाई जाती है। दरअसल, यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। आइए आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी बताते हैं।
राखी पर 3 गांठों का महत्व
“त्रिदेव रक्षा कुर्वन्तु सर्वदा।” — शास्त्रीय मान्यता
त्रिदेवों का प्रतीक और उनका महत्व
असल में ये 3 गांठें त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती है
पहली गांठ भाई की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए लगाई जाती है।
 दूसरी गांठ समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है।
तीसरी गांठ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं और मानसिक शांति प्रदान की जाती है।
ग्रहों और जीवन के पुरुषार्थों से कनेक्शन
इसके अतिरिक्त, यह 3 गांठें नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने और भाईबहन के रिश्ते को धर्म, अर्थ और काम के सही संतुलन से बांधने का प्रतिनिधित्व करती है।
इन बातों का रखें ध्यान
  जब आप राखी बांधें तो देखे लें कि भद्रा काल तो नहीं है। शास्त्रों में माना गया है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इस दौरान शुभ काम करने की मनाही होती है।
  राखी को हमेशा शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए।
  राखी बांधते समय भाईबहन काले कपड़े नहीं पहनें। माना जाता है कि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। 
  जब अपने भाई को राखी बांधे, तो भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वही, बहन के मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की तरफ होना जरुरी है।
  राखी बांधते समय बहन को किसी बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए।

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