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जॉब्स की भरमार, पर एक्सपोर्ट में पिछड़ापन! SEZ के मामले में तमिलनाडु के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

तमिलनाडु स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के लिए एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. यहां भारत में सबसे ज्यादा एक्टिव जोन हैं और SEZ से मिलने वाले रोजगार के मामले में यह दूसरे नंबर पर है. हालांकि, एक्सपोर्ट में इसकी बढ़त कम हो रही है क्योंकि गुजरात और कर्नाटक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. 31 जुलाई, 2026 तक देश में कुल 277 चालू SEZ थे, जिनमें से सबसे ज्यादा 49 तमिलनाडु में थे. इसके बाद कर्नाटक और तेलंगाना और महाराष्ट्र का नंबर आता है.

भारत में SEZ खास तौर पर बनाए गए इंडस्ट्रियल जोन हैं जो घरेलू और ग्लोबल मार्केट में काम करने वाले व्यवसायों को सेक्टरबेस्ड क्लस्टर और पॉलिसी सपोर्ट देते हैं. ये कॉस्ट कम करने और कामकाज आसान बनाने के लिए टैक्स और ड्यूटी में छूट, सिंगलविंडो क्लीयरेंस और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आसान नियम जैसे इंसेंटिव देते हैं. ये SEZ अलगथलग इलाकों के बजाय इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल सिस्टम के तौर पर काम करते हैं, जिससे निवेशकों को एक ही राज्य के अधिकार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम करने की सुविधा, पॉलिसी से जुड़ी निश्चितता और कई सेक्टर में काम करने के विकल्प मिलते हैं.

सेज से बढ़ाया रोजगार

वित्त वर्ष 2026 में तमिलनाडु के SEZ में 6.27 लाख लोगों को रोजगार मिला, जो महाराष्ट्र के 6.52 लाख के बाद दूसरे नंबर पर है. इसके बाद तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जहां क्रमशः 5.27 लाख, 4.67 लाख और 2.56 लाख लोगों को रोजगार मिला. तमिलनाडु के SEZ में रोजगार वित्त वर्ष 2022 के 5.24 लाख से लगभग 20 फीसदी बढ़ा है. यह नेशनल लेवल पर SEZ रोजगार में हुई 21 फीसदी बढ़ोतरी के लगभग बराबर है. हालांकि, वित्त वर्ष 2022 में 5.24 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 5.92 लाख होने के बाद, रोज़गार वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 7.28 लाख से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 6.27 लाख हो गया.

कैसा रहा एक्सपोर्ट का ग्राफ?

देश में SEZ से कुल एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2022 में 9,90,447 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 16,36,192 करोड़ रुपए हो गया. तमिलनाडु के SEZ एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2022 में 1,36,329 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 2,12,288 करोड़ रुपए हो गए, जो लगभग 56 फीसदी की बढ़ोतरी है. इस ग्रोथ ने राज्य को SEZ एक्सपोर्टर्स की टॉप कैटेगरी में बनाए रखने में मदद की है, लेकिन राज्य की ग्रोथ टॉप एक्सपोर्टर्स के मुकाबले पीछे रही है. इस दौरान गुजरात के SEZ एक्सपोर्ट 70 फीसदी बढ़कर 4,05,595 करोड़ रुपए हो गए, जो तमिलनाडु के एक्सपोर्ट से लगभग दोगुना है. कर्नाटक के एक्सपोर्ट 60.8 फीसदी बढ़कर 2,69,004 करोड़ रुपए हो गए, जबकि महाराष्ट्र के एक्सपोर्ट 52.1 फीसदी बढ़कर 2,43,423 करोड़ रुपए हो गए.

तमिलनाडु की एक्सपोर्ट ग्रोथ एक जैसी नहीं रही. यह वित्त वर्ष 2023 में 26.6 फीसदी बढ़ी, वित्त वर्ष 2024 में धीमी होकर 3.1 फीसदी रह गई, फिर वित्त वर्ष 2025 में 14.3 फीसदी और वित्त वर्ष 2026 में 4.4 फीसदी तक सुधरी. इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, IT/ITES और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अलगअलग तरह के उद्योगों वाला राज्य का बेस, इसके बड़े रोजगार बेस को सपोर्ट करता रहता है. लेकिन गुजरात और कर्नाटक के साथ एक्सपोर्ट का बढ़ता अंतर नए इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने और अपने SEZ की एक्सपोर्ट क्षमता को बढ़ाने की जरूरत को दिखाता है.

एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने का चल रहा काम

स्टेट इंडस्ट्रीज प्रमोशन कॉर्पोरेशन ऑफ तमिलनाडु लिमिटेड , जो इंडस्ट्रियल पार्क बनाने और उन्हें मैनेज करने के साथसाथ दूसरे इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराता है, ने इंडस्ट्रियल ग्रोथ और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 8 SEZ बनाए हैं. यह कांचीपुरम जिले के पनापक्कम में जनरल मैन्युफैक्चरिंग और नॉनलेदर फुटवियर के लिए एक मल्टीप्रोडक्ट SEZ भी विकसित कर रहा है. राज्य की इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी, ‘गाइडेंस तमिलनाडु’ का कहना है कि SEZ इंजीनियरिंग, ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, IT/ITES और फ्री ट्रेड व वेयरहाउसिंग जोन जैसे कई सेक्टर के लिए इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करते हैं.

इससे इन्वेस्टर्स को एक ही राज्य के इकोसिस्टम में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज़ और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन चलाने की सुविधा मिलती है. इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि हाल की पॉलिसी पहल और हाईएंड इलेक्ट्रॉनिक्स व नॉनलेदर फुटवियर जैसे सेक्टर में बढ़ती दिलचस्पी से आने वाले सालों में एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिल सकती है. तमिलनाडु के लिए चुनौती यह है कि वह अपने बड़े SEZ नेटवर्क और रोजगार के आधार का इस्तेमाल तेजी से एक्सपोर्ट बढ़ाने और ज्यादा नौकरियां पैदा करने में करे.

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