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नकली दवा के कारोबार पर योगी सरकार का बड़ा वार! अब दुकान नहीं, पूरी सप्लाई चेन खंगालेगा FSDA

लखनऊ, अमृत विचार: मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ कर नकली, मिलावटी और नशीली दवाओं का कारोबार करने वालों पर योगी सरकार ने शिकंजा कस दिया है। दवा की दुकान पर छापा मारकर कुछ संदिग्ध शीशियां पकड़ लेना ही कार्रवाई का अंत नहीं होगा।

अब एफएसडीए दवा के लाइसेंस से लेकर गोदाम, बिलिंग, बैंक खाते, डिजिटल रिकॉर्ड और पूरी सप्लाई चेन को खंगालेगा। नकली दवा कारोबारी से सप्लायर और निर्माता तक जांच होगी। डमी व्यक्ति के नाम लाइसेंस लेकर कारोबार चलाने, फर्जी बिलिंग और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने के साथ मुकदमा भी दर्ज होगा।

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी एसओपी में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। साफ निर्देश है कि जांच केवल दुकान की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगी। दवा कहां से आई, किसने खरीदी, किसे बेची गई और भुगतान किस खाते से हुआ, हर कड़ी जोड़ी जाएगी। नया थोक औषधि लाइसेंस लेने वालों की पृष्ठभूमि खंगाली जाएगी। पहले अवैध दवा कारोबार में शामिल रहे व्यक्ति अगर पत्नी, भाई, बहन, मातापिता या किसी अन्य रिश्तेदार अथवा डमी व्यक्ति के नाम पर फिर लाइसेंस लेने की कोशिश करेंगे तो कार्रवाई होगी। 

गंभीर उल्लंघनकर्ताओं को लाइसेंस से डिबार किया जाएगा। उनके बिजनेस पार्टनर और एसोसिएट की भूमिका भी जांच के घेरे में होगी। लाइसेंस किसी महिला या दूसरे व्यक्ति के नाम और कारोबार कोई और चला रहा है तो भी कार्रवाई होगी। बैंक खाता, जीएसटी और दूसरे दस्तावेज लाइसेंसधारी के नाम होने जरूरी होंगे। दुकान के बजाय बेसमेंट, मकान या किराए के कमरे में दवाओं का अवैध स्टॉक मिला तो उसे भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।

एफएसडीए बिलिंग सॉफ्टवेयर तक पहुंचेगा। माइनस स्टॉक, बैक डेटेड बिल, डेटा डिलीट करना, दोहरे खाते और वास्तविक स्टॉक छिपाने जैसी हर गतिविधि पर नजर होगी। छापेमारी में सीसीटीवी डीवीआर, ईवे बिल, ट्रांसपोर्ट रिसिप्ट, बैच नंबर, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान सुरक्षित किए जाएंगे। बैंक ट्रांजेक्शन से कागजों पर दिखाए गए कारोबार और वास्तविक लेनदेन का मिलान होगा।

स्टॉक में एक गोली का हिसाब भी देना होगा

डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक्स, कैंसर और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग व हाई वैल्यू दवाओं के कागजी और वास्तविक स्टॉक का मिलान होगा। अंतर मिला तो सीधे दवा के स्रोत की पड़ताल शुरू होगी। एक ही फर्म से माल खरीदकर उसी को वापस बेचने, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवा बेचने, क्रॉस बिलिंग और कागजों में स्टॉक एडजस्ट करने जैसे खेल भी पकड़े जाएंगे। दूसरे राज्यों से आने वाली संदिग्ध दवाओं के मामले में वहां के औषधि निरीक्षकों के जरिए निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यानी संदिग्ध दवा की एक खेप भी अब पूरी सप्लाई चेन को जांच के घेरे में ला सकती है।

सरकारी दवा बाजार में बेचने वालों पर भी वार

सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई, फिजिशियन सैंपल या एक्सपायर्ड दवाओं को रिलेबल कर बाजार में खपाने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा। इंसुलिन और वैक्सीन जैसी कोल्ड चेन दवाएं 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के निर्धारित तापमान से बाहर मिलीं तो स्टॉक कब्जे में लेकर कार्रवाई होगी। कई फर्मों के बीच बिलिंग लूप या कॉकस मिला तो पूरे नेटवर्क की एक साथ जांच होगी।

नशीली दवाओं के नेटवर्क पर दोहरा वार

कोडीन सिरप, पेन किलर और एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध कारोबार पर विशेष निगरानी होगी। जांच में संगठित नेटवर्क सामने आया तो मामला केवल औषधि कानून तक सीमित नहीं रहेगा। बीएनएस, 2023 और एनडीपीएस की सुसंगत धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा अथवा गंभीर अनियमितता मिलने पर बिक्री और वितरण तत्काल रोकने, स्टॉक सीज करने और लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने की कार्रवाई होगी। लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित फर्म से दवाओं की खरीदबिक्री पूरी तरह बंद कराई जाएगी। वैध खरीद अभिलेख नहीं मिले तो पूरा स्टॉक राजकीय अभिरक्षा में लिया जाएगा।

 

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