राजस्थान के नागौर में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी गोपाल विश्नोई के तीन अलग-अलग ठिकानों पर बुलडोजर एक्शन हुआ है. इसे नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. पुलिस ने राज्य में नशा तस्करी को रोकने के लिए अपराधियों के खिलाफ कमर तोड़ अभियान शुरू किया है. कुख्यात मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले गोपाल विश्नोई के खिलाफ हुए बुलडोजर एक्शन में उसके तीन मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है. अवैध तरीके से बनाए गए मकानों को चिन्हित कर जमींदोज कर दिया गया. गोपाल विश्नोई के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत तीन गंभीर मामले दर्ज हैं और हाल ही में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था.
नागौर सीओ जतिन जैन ने बताया कि अठियासन के रहने वाला नशा तस्करी गोपाल बिश्नोई के खिलाफ कार्रवाई की गई है. अवैध तरीके से अर्जित की गई काली कमाई और उससे कराए गए निर्माण को चिन्हित कर ध्वस्त किया गया है. तस्कर द्वारा गोचर भूमि (पशुओं के चरने के लिए आरक्षित जमीन) पर अवैध रूप से कब्जा करके तीन मकान बनाए गए थे, जिन्हें चिंहित किया गया. इनमें से एक मकान, जो स्वयं अपराधी गोपाल बिश्नोई के नाम पर था, उसे कानूनी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई के बाद ध्वस्त कर दिया गया.
पुलिस ने दिया था नोटिस
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने स्पष्ट किया कि बाकी के दो मकानों में वर्तमान में लोग रह रहे हैं, जिन्हें नियमानुसार 15 दिन का नोटिस चस्पा किया गया है. नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद इन अवैध निर्माणों पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलेगा. इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य जिले में सक्रिय नशा तस्करों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना और उनके वित्तीय ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना है. पुलिस का कहना है कि नागौर को नशा मुक्त बनाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाइयां जारी रहेंगी, ताकि अपराधियों के बीच प्रशासन का भय बना रहे.
अवैध जमीन पर किया था कब्जा
नागौर तहसीलदार नरसिंह टाक ने बताया कि अठियासन गांव के खसरा नंबर 406 की करीब 3 बीघा सरकारी गोचर भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया है. जांच के दौरान यह पाया गया कि तस्कर ने पशुओं के चरने की आरक्षित जमीन पर अपने अवैध निर्माण खड़े कर रखे थे. राजस्व विभाग ने इस मामले में धारा 91 के तहत कार्रवाई शुरू करते हुए संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन कोई भी व्यक्ति भूमि पर अपना कानूनी अधिकार साबित नहीं कर पाया. साक्ष्यों के अभाव और अवैध कब्जे की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने बेदखली के आदेश जारी किए और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया.




