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कौन है बेस्ट CM और Gen Z में फेवरेट नेता?, अभिजीत दीपके ने बताया

नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके युवाओं की भारी भीड़ के साथ एक बार फिर राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। सीजेपी ने आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में एक बड़े शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान किया है। इस बड़े आंदोलन की तैयारियों के बीच पार्टी संस्थापक ने देश की राजनीति, युवाओं की पसंद और बेहतरीन मुख्यमंत्रियों को लेकर कई बेबाक बयान दिए हैं, जो अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

थलपति विजय हैं जेनजी की पसंद, ‘बुजुर्ग’ युवा नेताओं पर कसा तंज
एक टीवी कार्यक्रम के दौरान जब अभिजीत दीपके से पूछा गया कि आज की ‘जेनजी’ पीढ़ी के बीच सबसे लोकप्रिय नेता कौन है, तो उन्होंने बेहद दिलचस्प जवाब दिया। दीपके ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार से राजनेता बने थलपति विजय का नाम लेते हुए कहा कि विजय का पूरा कैंपेन युवाओं पर केंद्रित रहा है, इसलिए वह जेनजी की पसंद हो सकते हैं। पार्टी नेता सौरभ दास ने भी दक्षिण में विजय की भारी फैन फॉलोइंग का समर्थन किया। वहीं, मौजूदा दौर के ‘युवा नेताओं’ पर तंज कसते हुए दीपके ने कहा कि आज जिन्हें युवा नेता कहा जाता है, उनकी उम्र इतनी हो चुकी है कि आम नौकरियों में उस उम्र के लोग रिटायर हो जाते हैं।

स्टालिन, पिनराई विजयन और केजरीवाल को बताया बेस्ट CM
देश के अब तक के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री के सवाल पर सीजेपी संस्थापक ने तीन बड़े नेताओं के काम की खुलकर तारीफ की। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आर्थिक नीतियों को शानदार बताया। इसके अलावा, उन्होंने केरल में एजुकेशन और हेल्थ केयर मॉडल को बेहतरीन ढंग से लागू करने के लिए पिनराई विजयन की सराहना की। दीपके ने अरविंद केजरीवाल की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली के स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में वाकई काफी अच्छा काम किया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक चला था ऐतिहासिक आंदोलन
गौरतलब है कि सीजेपी ने इसी साल जूनजुलाई में नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतरमंतर पर एक विशाल आंदोलन किया था। उस दौरान सीजेपी तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई थी। इस आंदोलन में जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल की थी। छात्रों और युवाओं के इस भारी दबाव के बाद ही धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा सौंपना पड़ा था, जिसके बाद प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाली थी। अब उसी तर्ज पर 5 सितंबर को एक और बड़े मार्च की तैयारी है।

राज्य सरकारों से मांगा स्कूलों की बदहाली का पूरा हिसाब
सड़क पर उतरने के साथसाथ सीजेपी कागजी स्तर पर भी व्यवस्था सुधारने की कवायद में जुटी है। सोमवार को पार्टी ने सभी राज्य सरकारों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर पिछले पांच वर्षों में स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों के खाली पदों और आवंटित फंड का पूरा हिसाब मांगा है। दीपके का कहना है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो बदहाल तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। आजादी के इतने सालों बाद भी कई जगह बच्चों को सुरक्षित पेयजल, इस्तेमाल करने लायक साफ शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं।

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