‘यंत्रबुद्धि : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पुस्तक के लिए मिलेगा प्रतिष्ठित सम्मान, 14 सितंबर को मुंबई में अमित शाह करेंगे सम्मानित

नई दिल्ली : सुविख्यात तकनीकविद, लेखक एवं डिजिटल तकनीक विशेषज्ञ बालेन्दु शर्मा दाधीच को केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिष्ठित राजभाषा गौरव सम्मान का प्रथम पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें उनकी चर्चित पुस्तक ‘यंत्रबुद्धि : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के लिए दिया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे तेजी से बदलते तकनीकी विषय को हिंदी में सरल, व्यापक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए उनकी इस कृति को विशेष रूप से सराहा गया है।
श्री दाधीच को यह प्रतिष्ठित सम्मान 14 सितंबर को मुंबई में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें पुरस्कार प्रदान करेंगे। राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन और हिंदी में समकालीन तकनीकी विषयों को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों के लिए दिया जाने वाला यह सम्मान उनके साहित्यिक एवं तकनीकी योगदान को नई पहचान प्रदान करता है।
एआई को हिंदी में समझाने की पहल
बालेन्दु शर्मा दाधीच की पुस्तक ‘यंत्रबुद्धि : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अवधारणा, उसके विकास, उपयोग और भविष्य की संभावनाओं को आम पाठकों के लिए सहज भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। तकनीकी विषयों को हिंदी में प्रस्तुत करने की उनकी शैली ने इस पुस्तक को व्यापक चर्चा दिलाई है।
तकनीक और हिंदी के बीच सेतु बनाने के लिए जाने जाने वाले दाधीच लंबे समय से डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी भाषा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनका मानना रहा है कि नई तकनीकों की जानकारी केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भारतीय भाषाओं में भी तकनीकी ज्ञान को सहज रूप से उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
दुबई की कंपनी के CEO और ‘रिस्किल नेशन’ के संस्थापक
श्री दाधीच इन दिनों दुबई स्थित कंपनी एल्गो टेक्नोलॉजीज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे भारत में एआई स्किलिंग और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की दिशा में काम करने वाले ‘रिस्किल नेशन’ के संस्थापक भी हैं।
तकनीक के क्षेत्र में बदलते रोजगार परिदृश्य और एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच दाधीच का फोकस नई पीढ़ी को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने पर रहा है। राजभाषा गौरव सम्मान का प्रथम पुरस्कार उनकी इसी बहुआयामी भूमिका में हिंदी के माध्यम से तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देने के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



