
पुणे के वाघोली में कथित आध्यात्मिक केंद्र पर पुलिस की छापेमारी से मचा हड़कंप, 15 साल से प्रताड़ना झेलने का महिला ने लगाया आरोप; सीसीटीवी से घिरा था आश्रम, गुप्त सुरंग और संदिग्ध दवाइयां मिलने से जांच और गहराई
पुणे के वाघोली इलाके में 2026 को पुलिस की एक कार्रवाई ने एक कथित आध्यात्मिक केंद्र के पीछे छिपी ऐसी कहानी सामने ला दी, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। खुद को भगवान का अवतार बताने वाले राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा और उसके सात सहयोगियों को पुलिस ने यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और अमानवीय प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार किया।
पुलिस के सामने मामला तब आया, जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि वह करीब 15 वर्षों से इस कथित बाबा के प्रभाव में थी और इस दौरान उसे मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
जो जगह बाहर से आध्यात्मिक केंद्र या ‘मॉडर्न गुरुकुल’ के रूप में दिखाई देती थी, पुलिस की जांच में उसके भीतर कई ऐसी चीजें सामने आईं, जिनसे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
डॉक्टर परिवार की महिला ने दर्ज कराई शिकायत
शिकायत करने वाली महिला उच्चशिक्षित बताई गई है और उसका संबंध डॉक्टर परिवार से था। महिला के अनुसार, वह वर्षों पहले बाबा के संपर्क में आई थी। धीरे-धीरे बाबा ने उस पर ऐसा मानसिक प्रभाव बना लिया कि वह उसके निर्देशों का विरोध करने की स्थिति में नहीं रही।
महिला ने पुलिस को बताया कि उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी।
आरोप है कि विरोध करने या बाबा की बात न मानने पर उसे बिजली के झटके दिए जाते थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अमानवीय तरीके से प्रताड़ित करते हुए बाबा का मूत्र पीने के लिए मजबूर किया जाता था।
इन आरोपों ने पुलिस जांच को और गंभीर बना दिया।
पति से तलाक और संपत्ति पर भी नजर
महिला ने आरोप लगाया कि बाबा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अपने पति से अलग होने के लिए मजबूर किया।
इसके बाद कथित तौर पर उसकी संपत्ति और गहनों पर भी कब्जा कर लिया गया।
महिला का दावा है कि बाबा और उसके सहयोगियों ने उसके निजी और आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।
यानी महिला के लिए यह सिर्फ धार्मिक आस्था का मामला नहीं रहा था। आरोपों के मुताबिक, धीरे-धीरे उसके निजी जीवन, रिश्तों और संपत्ति पर भी कथित तौर पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।
आश्रम में डर का माहौल बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, इस कथित आध्यात्मिक केंद्र में अनुयायियों पर मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए डर का माहौल बनाया जाता था।
आरोप है कि बाबा खुद को सामान्य इंसान नहीं बल्कि भगवान का अवतार बताता था। उसके अनुयायियों में ऐसी धारणा बनाई जाती थी कि उसके आदेशों पर सवाल उठाना या उसका विरोध करना नुकसानदायक हो सकता है।
इसी मानसिक दबाव के कारण कई लोग कथित तौर पर लंबे समय तक उसके प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाए।
चारों तरफ लगे थे सीसीटीवी कैमरे
पुलिस ने जब वाघोली स्थित कथित आश्रम में छापा मारा तो वहां सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या और उनकी व्यवस्था ने अधिकारियों का ध्यान खींचा।
पूरे परिसर में कैमरे लगे होने की बात सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों का इस्तेमाल सामान्य सुरक्षा के लिए किया जाता था या फिर वहां रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या अनुयायियों और पीड़ितों को बाहरी दुनिया से संपर्क करने से रोकने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था।
जमीन के नीचे बन रही थी गुप्त सुरंग
छापेमारी के दौरान पुलिस को परिसर में एक गुप्त सुरंग भी मिली, जो निर्माणाधीन बताई गई।
सुरंग का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, यह अभी जांच का विषय है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इसका संबंध किसी संदिग्ध गतिविधि से था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था।
सुरंग मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने पूरे परिसर की संरचना और वहां मौजूद दूसरे कमरों की भी बारीकी से जांच शुरू की।
सैकड़ों संदिग्ध दवाइयों की शीशियां मिलीं
आश्रम से पुलिस को बड़ी संख्या में दवाइयों की शीशियां भी मिलीं। इन दवाइयों को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दवाइयां किसलिए इस्तेमाल होती थीं, किसने इन्हें मंगाया था और क्या वहां रहने वाले लोगों को इन्हें दिया जाता था।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कहीं अनुयायियों या कथित पीड़ितों को सुस्त या अचेत रखने के लिए किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं किया जाता था।
हालांकि, इसका सच फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
बाहर से आध्यात्मिक केंद्र, अंदर से कथित नियंत्रण का तंत्र?
मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस कथित आश्रम की गतिविधियों और वहां रहने वाले लोगों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इतने वर्षों तक यह पूरा तंत्र कैसे चलता रहा और पीड़ित लोग समय रहते बाहर क्यों नहीं निकल पाए?
मनोवैज्ञानिक नियंत्रण, डर, कथित ब्लैकमेलिंग और सामाजिक अलगाव जैसे तरीके किसी व्यक्ति को लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस आरोपों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है।
बाबा समेत आठ लोग गिरफ्तार
पुणे पुलिस ने इस मामले में राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के साथ उसके सात सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर कथित आश्रम की गतिविधियों और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ-साथ पुलिस को मिले कथित इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच की सीमा कब किसी व्यक्ति के शोषण का जरिया बन जाती है।
किसी व्यक्ति को गुरु, साधु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानना निजी आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन जब कथित तौर पर डर, ब्लैकमेल, हिंसा या आर्थिक दबाव के जरिए किसी की जिंदगी पर नियंत्रण स्थापित किया जाए, तो मामला गंभीर अपराध का रूप ले सकता है।
नोट: यह कहानी उपलब्ध शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और लगाए गए आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले के बाद ही होगी।



