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इंदौर के पास स्थित डाक विभाग की ‘डाक कॉलोनी’ में 11 जुलाई 2026 की सुबह एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। घर में रहने वाली असिस्टेंट पोस्ट मास्टर उर्मिला सैनी की उसके पति अखिलेश ने कथित तौर पर चाकू से हत्या कर दी।
सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वारदात के समय घर में सिर्फ पति-पत्नी थे। दोनों बच्चे स्कूल जा चुके थे। अखिलेश ने कथित तौर पर इसी मौके को हत्या के लिए चुना, ताकि घर में कोई मौजूद न हो।
उसे शायद अंदाजा था कि अगर बच्चों को कुछ पता चला तो उसकी योजना बिगड़ सकती है।
बच्चों के स्कूल जाते ही घर में छाया खौफ
उस सुबह रोज की तरह दोनों बच्चे स्कूल चले गए थे। उर्मिला घर पर थी और अखिलेश भी वहीं मौजूद था।
पुलिस जांच के अनुसार, अखिलेश ने कथित तौर पर पहले से पत्नी की हत्या की योजना बना रखी थी।
आरोप है कि बच्चों के घर से निकलते ही उसने उर्मिला पर चाकू से हमला कर दिया।
उर्मिला ने बचने की कोशिश की और चीख-पुकार मचाई होगी, लेकिन अखिलेश ने कथित तौर पर उसकी आवाज दबाने के लिए घर में टीवी की आवाज बहुत तेज कर दी।
बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, जबकि घर के भीतर एक महिला की जिंदगी खत्म हो रही थी।
हत्या के बाद भी नहीं घबराया आरोपी
उर्मिला की हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को बचाने की तैयारी शुरू कर दी।
उसने खून से सने कपड़े घर के पास बने एक चेंबर में छिपा दिए।
इसके बाद वह वापस घर आया और सामान्य तरीके से नहाया।
कपड़े बदले, माथे पर टीका लगाया और ऐसा व्यवहार किया जैसे घर में कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन उसके अगले कदम ने इस पूरी घटना को और भी विचलित करने वाला बना दिया।
पत्नी का सामान लेकर बच्चों के स्कूल पहुंचा
अखिलेश ने कथित तौर पर उर्मिला का कीमती हार, एटीएम कार्ड, स्कूटी और घर की चाबी एक पॉलीथिन बैग में रख ली।
इसके बाद वह अपने बच्चों के स्कूल पहुंच गया।
वहां उसने बेटी को वह बैग देते हुए कहा कि इसमें उसकी मां का कीमती सामान रखा है और इसे संभालकर रखना।
बैग में घर की चाबी और एटीएम कार्ड के पिन से जुड़ा कागज भी होने की बात उसने बच्चों को बताई।
इसके बाद उसने बच्चों से कहा कि वह और उनकी मां जरूरी काम से भोपाल जा रहे हैं और अगले दिन तक वापस लौट आएंगे।
बच्चों को दिया ऐसा निर्देश, जिसका सच उन्हें बाद में पता चला
अखिलेश ने बच्चों से कहा कि स्कूल की छुट्टी के बाद वे छोटे भाई को साथ लेकर सीधे अपनी पूजा मौसी के घर चले जाएं।
यह कहकर वह वहां से निकल गया।
बच्चों के लिए उस समय यह सिर्फ पिता की कही एक सामान्य बात थी। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी मां घर में अकेली नहीं बल्कि हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।
दोपहर में बच्चे घर लौटे तो पैरों तले जमीन खिसक गई
स्कूल की छुट्टी के बाद दोनों बच्चे बताए गए निर्देश के मुताबिक मौसी के घर जाने के बजाय अपने कपड़े बदलने के लिए घर पहुंच गए।
जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा, उनकी नजर उस दृश्य पर पड़ी जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
घर में उनकी मां उर्मिला का खून से लथपथ शव पड़ा था।
दोनों बच्चे घबरा गए और जोर-जोर से रोने लगे।
उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
पड़ोसियों ने जब घर के अंदर जाकर उर्मिला का शव देखा तो वे भी स्तब्ध रह गए।
कुछ ही देर पहले जिस घर में एक मां अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रही होगी, उसी घर में अब उसका शव पड़ा था।
पति पर था पत्नी के चरित्र को लेकर शक
इस मामले में पुलिस के सामने पति अखिलेश के कथित शक की बात भी सामने आई।
बताया गया कि वह पत्नी को लेकर काफी शंकालु रहता था। पति के इसी संदेह और वैवाहिक तनाव ने कथित तौर पर रिश्ते को बेहद खराब कर दिया था।
हालांकि, किसी भी हत्या के पीछे वास्तविक कारण और आरोपी की भूमिका पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होती है।
लेकिन जिस तरह वारदात को अंजाम देने के बाद बच्चों को गुमराह करने की कोशिश की गई, उससे जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल खड़े हो गए।
वारदात के बाद भी खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को सामान्य दिखाने की पूरी कोशिश की।
खून से सने कपड़े छिपाना, नहाकर कपड़े बदलना, माथे पर टीका लगाना और फिर बच्चों के स्कूल पहुंचना—ये सभी कदम कथित तौर पर इस तरह उठाए गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन घर में पड़ा उर्मिला का शव उसके बनाए पूरे झूठ को सामने ले आया।
दो बच्चों से एक साथ छिन गया पूरा परिवार
इस घटना का सबसे बड़ा खामियाजा दोनों बच्चों को भुगतना पड़ा।
एक तरफ उनकी मां की हत्या हो चुकी थी और दूसरी तरफ उनके पिता पर ही उस हत्या का आरोप लगा।
जिन बच्चों को उस सुबह स्कूल भेजते समय शायद यह पता भी नहीं था कि शाम तक उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी, वे दोपहर में घर लौटे तो उनके सामने उनकी मां की लाश थी।
यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक परिवार के टूट जाने की घटना थी।
शक जब रिश्ते पर भारी पड़ जाए
पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह का शक रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है। लेकिन जब शक हिंसा का रूप ले लेता है तो उसका परिणाम बेहद भयावह हो सकता है।
उर्मिला और अखिलेश की यह कहानी भी इसी सवाल को सामने रखती है कि रिश्ते में पैदा हुए संदेह और विवाद को समय रहते बातचीत, परिवार या उचित सहायता के जरिए सुलझाना कितना जरूरी है।
एक परिवार, जिसमें मां नौकरी करती थी, पिता साथ था और दो बच्चे स्कूल जाते थे, कुछ ही घंटों में बिखर गया।
नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।


