
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
आम बजट से पहले सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया है. इस आर्थिक सर्वेक्षण में बिहार की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी गई है. देश में बिहार के लोग सबसे गरीब हैं. बिहार के लोगों की प्रति व्यक्ति सालाना आमदनी देश में सबसे कम है. भारत सरकार के 2025 26 के आर्थिक सर्वेक्षण से इसका खुलासा हुआ है. इस सर्वेक्षण के बाद बिहार में राजनीति भी शुरू हो गई है.
बिहार देश का सबसे गरीब राज्य है, प्रति व्यक्ति सालाना औसत आमदनी के मामले में. बिहार के हर व्यक्ति की सालाना औसत कमाई 70000 रुपए से भी काम है. भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में इसका खुलासा हुआ है जो आर्थिक सर्वेक्षण की सूची में शामिल 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार सबसे नीचे है.
आरजेडी ने पूछा- नीतीश ने क्या किया?
हालांकि बिहार की विकास दर अच्छा रहा है, लेकिन बिहार अपने पिछले तीन सालों के विकास दर से इस साल खुद ही पिछड़ गया है. बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद इसको लेकर नीतीश सरकार पर सवाल खड़े कर रही है. आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है तब भी यही हाल है और वह सारा दोष पिछली सरकारों पर डालते हैं.
दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार कह रहे हैं कि बिहार पहले माइंस में था नीतीश कुमार ने माइंस वाले बिहार को बाहर निकाला है बिहार अब कई मामलों में अव्वल राज्य है. आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार बिहार की अर्थव्यवस्था का आकार यानी सकल घरेलू उत्पाद भी 12 राज्यों से कम है.
कितना आका गया बिहार का सकल घरेलू उत्पाद?
2024- 25 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 8 लाख करोड़ आंका गया है. यह देश के 12 राज्यों से कम है, हालांकि बिहार की विकास दर देश के 22 राज्यों से अधिक है. वर्तमान मूल्य पर बिहार की जीडीपी विकास दर 2024 25 में 13.07 फीसदी आंकी गई है.
अब आर्थिक सर्वेक्षण क लेकर बिहार की नीतीश सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं. विपक्षी नेता बार-बार यही कह रहे हैं कि आखिर नीतीश कुमार ने पिछले 20 साल में किया क्या है? दो दशक में वो बिहार की तस्वीर नहीं बदल पाए.




