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रोजाना एक गिलास फ्रूट जूस पीने से कम हो सकता है डिप्रेशन? 4 हफ्ते की रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला असर

सुबह के समय एक गिलास फ्रूट जूस या स्मूदी लेना कई लोगों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। आमतौर पर इसे विटामिन और अन्य पोषक तत्वों का आसान स्रोत माना जाता है। लेकिन क्या फल और सब्जियों से भरपूर डाइट के साथ रोजाना फ्रूट जूस लेने का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है?

एक हालिया 4 हफ्ते की रिसर्च में इस सवाल को लेकर दिलचस्प नतीजे सामने आए। अध्ययन में उन लोगों को शामिल किया गया, जो आमतौर पर दिन में कम मात्रा में फल और सब्जियां खाते थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब प्रतिभागियों के आहार में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाई गई, तो उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ स्कोर में सुधार देखने को मिला। जिस समूह ने इसके साथ रोजाना फ्रूट जूस या स्मूदी का सेवन किया, उसमें डिप्रेशन के स्कोर में अपेक्षाकृत ज्यादा कमी देखी गई।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फ्रूट जूस डिप्रेशन का इलाज करता है। अध्ययन छोटा था और इसकी अवधि भी सिर्फ चार सप्ताह की थी।

4 हफ्ते की रिसर्च में क्या किया गया?

इस रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल में कुल 42 वयस्कों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया।

पहले समूह को अपनी सामान्य डाइट जारी रखने के लिए कहा गया। दूसरे समूह को साबुत फलों और सब्जियों की मदद से रोजाना करीब पांच सर्विंग तक पहुंचने के लिए कहा गया। तीसरे समूह को भी फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाने के लिए कहा गया, लेकिन इसके साथ रोजाना एक गिलास फ्रूट जूस या स्मूदी भी दी गई।

चार सप्ताह बाद शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के खानपान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बदलावों का आकलन किया। दोनों डाइट इंटरवेंशन समूहों में फल और सब्जियों का सेवन बढ़ा, लेकिन जूस या स्मूदी वाले समूह में डिप्रेशन स्कोर में ज्यादा कमी देखने को मिली।

डिप्रेशन स्कोर में कितनी कमी देखी गई?

शोध में मानसिक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए PHQ-9 और GAD-7 जैसी मान्य प्रश्नावलियों का इस्तेमाल किया गया। PHQ-9 का इस्तेमाल डिप्रेशन के लक्षणों और GAD-7 का इस्तेमाल एंग्जायटी के लक्षणों को मापने के लिए किया गया।

रिसर्च के अनुसार, फ्रूट जूस या स्मूदी लेने वाले समूह का डिप्रेशन स्कोर कंट्रोल समूह की तुलना में करीब 2.52 अंक कम था। कंट्रोल समूह का एडजस्टेड औसत स्कोर 5.45 रहा, जबकि जूस या स्मूदी वाले समूह का स्कोर 2.93 था।

यह अंतर दिलचस्प जरूर है, लेकिन केवल 42 लोगों के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि फ्रूट जूस हर व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण कम कर देगा।

फाइबर का सेवन भी बढ़ा

रिसर्च में प्रतिभागियों से कई बार 24 घंटे के डाइटरी रिकॉल भी लिए गए। इससे शोधकर्ताओं को यह पता लगाने में मदद मिली कि उन्होंने दिनभर में क्या-क्या खाया और पिया।

आंकड़ों से संकेत मिला कि दोनों डाइट इंटरवेंशन समूहों में रोजाना फाइबर का सेवन भी बढ़ा। यानी प्रतिभागियों ने जूस या स्मूदी लेने के कारण साबुत फल और सब्जियां खाना बंद नहीं किया, बल्कि कुल मिलाकर फल, सब्जियों और फाइबर का सेवन बढ़ गया।

यही कारण है कि रिसर्च के नतीजों को केवल जूस के प्रभाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा। बेहतर डाइट और ज्यादा फल-सब्जियों का सेवन भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

क्या फ्रूट जूस से ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा है?

फ्रूट जूस में प्राकृतिक शुगर मौजूद होती है, इसलिए इसे पीने की मात्रा को लेकर सावधानी जरूरी है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या है।

इस 4 हफ्ते की रिसर्च में जूस या स्मूदी लेने वाले समूह में मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़े कुछ संकेतकों पर कोई स्पष्ट प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया। लेकिन अध्ययन बहुत छोटा और कम अवधि का था। इसलिए इससे लंबे समय तक रोजाना जूस पीने की सुरक्षा या फायदे को लेकर पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पूरे फल में मौजूद फाइबर की वजह से आमतौर पर उसे जूस की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है। इसलिए फल को खाने की जगह हर दिन बड़ी मात्रा में जूस पीना जरूरी नहीं है।

क्या गट-ब्रेन कनेक्शन मूड को प्रभावित करता है?

फल और सब्जियों से मिलने वाला फाइबर आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम के लिए उपयोगी हो सकता है। आंत और मस्तिष्क के बीच होने वाले इस संबंध को गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।

डाइट, आंतों के बैक्टीरिया और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर वैज्ञानिकों में लगातार शोध चल रहा है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि फ्रूट जूस पीने से सीधे गट-ब्रेन कनेक्शन के जरिए डिप्रेशन ठीक हो जाता है।

क्या सुबह जूस पीना ज्यादा फायदेमंद है?

रिसर्च से यह साबित नहीं होता कि सुबह खाली पेट या सुबह के समय फ्रूट जूस पीने से डिप्रेशन पर कोई खास असर पड़ता है। अध्ययन का मुख्य फोकस कुल आहार में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाने पर था।

इसलिए सिर्फ सुबह एक गिलास जूस पीने के बजाय पूरे दिन संतुलित डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

डिप्रेशन के इलाज का विकल्प नहीं है फ्रूट जूस

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। इस रिसर्च में डिप्रेशन के स्कोर में कमी देखी गई, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि फ्रूट जूस डिप्रेशन का इलाज करता है।

डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति हो सकती है और इसके इलाज के लिए व्यक्ति की स्थिति के अनुसार मनोचिकित्सा, दवाएं या दोनों की जरूरत पड़ सकती है। अगर लंबे समय से उदासी, निराशा, किसी काम में रुचि न रहना, नींद या भूख में बदलाव जैसे लक्षण बने हुए हैं तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

रिसर्च की सबसे बड़ी सीमाएं क्या हैं?

इस अध्ययन में केवल 42 लोगों को शामिल किया गया था और प्रतिभागियों की निगरानी सिर्फ चार सप्ताह तक की गई। इतनी छोटी अवधि और छोटे सैंपल से किसी डाइट के लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।

इसके अलावा, डिप्रेशन स्कोर में सुधार का कारण केवल फ्रूट जूस था या फल-सब्जियों का बढ़ा हुआ सेवन, बेहतर डाइट और अन्य जीवनशैली बदलावों का संयुक्त प्रभाव था, इसे स्पष्ट करने के लिए बड़े और लंबे समय के अध्ययन की जरूरत है।

निष्कर्ष

चार सप्ताह की इस रिसर्च में हेल्दी डाइट के साथ रोजाना फ्रूट जूस या स्मूदी लेने वाले समूह में डिप्रेशन स्कोर में कमी देखने को मिली। साथ ही प्रतिभागियों के फल, सब्जियों और फाइबर के सेवन में भी बढ़ोतरी हुई।

लेकिन इसे फ्रूट जूस से डिप्रेशन का इलाज होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अगर आप अपनी डाइट में जूस शामिल करना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में 100% फ्रूट जूस लिया जा सकता है, लेकिन साबुत फल और सब्जियां भी नियमित रूप से खाना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक छोटे और कम अवधि वाले शोध के आधार पर है। फ्रूट जूस को डिप्रेशन की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

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