
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर है। उसे 31 दिन की फरलो मिली है। यह 2020 के बाद उसकी 17वीं फरलो या पैरोल है। इससे एक सवाल बार-बार उठता है- आखिर एक सजायाफ्ता कैदी इतनी बार जेल से बाहर कैसे आ सकता है? इसका जवाब समझने के लिए पहले पैरोल और फरलो का फर्क जानना जरूरी है।
पैरोल क्या होती है?
पैरोल का मतलब है कि किसी कैदी को उसकी सजा पूरी होने से पहले कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाती है। आमतौर पर इसके पीछे खास परिस्थितियां या मानवीय आधार हो सकते हैं। जैसे परिवार में किसी की मौत या बीमारी आदि में देखने जाना। कैदी को तय शर्तों का पालन करना होता है और निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद जेल लौटना पड़ता है।
हरियाणा के नियमों के तहत पैरोल एक सीमित अवधि के लिए दी जा सकती है। पैरोल पर बाहर बिताया गया समय आम तौर पर सजा की अवधि में नहीं जुड़ता, यानी वह समय जेल में काटी गई सजा के तौर पर नहीं गिना जाता।
फिर फरलो क्या है?
फरलो भी जेल से अस्थायी छुट्टी है, लेकिन इसका उद्देश्य पैरोल से अलग है। फरलो को लंबे समय की सजा काट रहे कैदियों को जेल के बाहर कुछ समय बिताने का अवसर देने की व्यवस्था के तौर पर समझा जा सकता है। यानी लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदियों को बिना किसी खास वजह के परिवार से संबंध बनाए रखने के लिए ‘फरलो’ (छुट्टी) दी जाती है। हरियाणा के कानून में पात्र कैदियों के लिए फरलो का प्रावधान है और निर्धारित शर्तें पूरी होने पर इसे मंजूर किया जा सकता है। एक बात ध्यान रहे- फरलो पर बिताया गया समय सजा की अवधि में गिना जाता है। यानी कैदी की सजा निरंतर चलती रहती है।
राम रहीम को बार-बार छुट्टी कैसे मिलती है?
राम रहीम को 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से उसे कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। अक्टूबर 2020 में पहली बार जेल से बाहर आने के बाद अगस्त 2026 तक वह कुल 17 बार अस्थायी रूप से जेल से बाहर आ चुका है। इस दौरान उसे 21 दिन से लेकर 50 दिन तक की अलग-अलग अवधि की छुट्टियां मिलीं।
यही वजह है कि राम रहीम की पैरोल लगातार चर्चा में रहती है। खास तौर पर 2024 और 2025 में उसकी कुछ रिहाइयां चुनावों के आसपास हुईं, जिस पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए। हालांकि, किसी कैदी को पैरोल या फरलो मिलना अपने आप में जेल से स्थायी रिहाई नहीं है। हर बार सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और तय शर्तें लागू होती हैं।



