
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि हाई कोर्ट को इस मामले की अपील पर फैसला सुनाने में ही दो दशक से ज्यादा का समय लग गया।
पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला दिखाता है कि कैसे एक संगीन अपराध बिना सजा के रह गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को 22 साल तक लंबे ट्रायल की प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उसके बाद सजा के खिलाफ की गई अपील को खारिज होने में भी 22 साल और लग गए।
क्या है 1981 का यह मामला?
यह पूरी घटना 18 अक्टूबर 1981 की है। घटना दुमका जिले के भुरुंडिया गांव में हुई। विभूति मंडल, बनारसी मंडल और उनके परिवार के सदस्य धान की कटाई के लिए गए थे। तभी तीर-कमान और कुल्हाड़ी से लैस लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें विभूति और बनारसी मंडल की हत्या कर दी गई।



