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विदेशी बाजार में देसी कंपनियों की धूम, अपना सामान बेचकर भारत ले आए 1 लाख करोड़ रुपये!

दुनिया भर के बाजारों में इस समय काफी उठापटक चल रही है. अमेरिका के कड़े टैरिफ नियम, डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर पड़ता रुपया, ऐसी तमाम चुनौतियों ने ग्लोबल ट्रेड को मुश्किल बना दिया है. लेकिन, इन मुश्किल हालातों में भी भारतीय कंपनियों ने विदेशी बाजारों में अपना परचम लहराया है. वित्त वर्ष 2026 के आंकड़े बताते हैं कि रोजमर्रा के सामान, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, शराब बनाने वाली दिग्गज कंपनियों ने निर्यात के मोर्चे पर शानदार काम किया है. इन कंपनियों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से बढ़ाया है.

एक्सपोर्ट से बंपर कमाई

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 20 बड़ी लिस्टेड कंपनियों में आईटीसी, मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर इंडिया, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, हीरो मोटोकॉर्प, डाबर, एशियन पेंट्स, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, वोल्टास, यूनाइटेड स्पिरिट्स जैसी कंपनियों ने मिलकर वित्त वर्ष 2026 में 1,08,269 करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा कमाई है. एक्सपोर्ट से होने वाली इस कमाई में 29 फीसदी का भारी उछाल आया है, जो पिछले चार सालों में सबसे तेज रफ्तार है. एक तरफ जहां कच्चे माल, स्पेयर पार्ट्स, कैपिटल गुड्स के इंपोर्ट पर कंपनियों का खर्च 17 फीसदी बढ़कर 1,04,361 करोड़ रुपये रहा, वहीं मजबूत एक्सपोर्ट की बदौलत ये सभी कंपनियां नेट फॉरेक्स पॉजिटिव बनने में कामयाब रहीं.

चुनौतियों से निपटने की सटीक रणनीति

ग्लोबल मार्केट की रुकावटों से पार पाना आसान नहीं था. जब विदेश से सामान मंगाना महंगा हो रहा था, तब इन कंपनियों ने बेहद स्मार्ट रणनीति अपनाई. बाहर से महंगे पुर्जे मंगाने के बजाय कंपनियों ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर अपना जोर बढ़ा दिया. हुंडई इंडिया ने अपनी लागत को कम रखने के लिए महंगी एजीएम बैटरी, फ्रंट कैमरे, फ्यूल डिलीवरी पाइप जैसे अहम पार्ट्स को देश में ही बनाने पर फोकस किया. एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर अतुल खन्ना का कहना है कि रुपये में गिरावट से पैदा हुई दिक्कतों के बीच नए बाजारों में अपना एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी है. उनका मानना है कि कंपनी हर साल लोकलाइजेशन 1 से 2 फीसदी तक बढ़ाएगी. ये एक ऐसा कदम है जिससे कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन भी बेहतर हो रहा है.

दुनिया भर के ग्राहकों पर फोकस

आज के समय में भारतीय ब्रांड्स की पहुंच का दायरा काफी बड़ा हो गया है. मारुति सुजुकी, मैरिको, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बजाज ऑटो, ब्लू स्टार जैसी कंपनियों के कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी 1 से 5 फीसदी तक बढ़ गई है. आईटीसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि विदेशी मुद्रा कमाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. इसके जरिए वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धा क्षमता को जांच रहे हैं. शराब बनाने वाली कंपनी रेडिको खेतान ने भी इस दिशा में शानदार काम किया है. कंपनी के एमडी अभिषेक खेतान के मुताबिक, वे अब 100 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं. एक्सपोर्ट से होने वाली उनकी कमाई 25 फीसदी बढ़कर 327 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. उनका फोकस सिर्फ विदेश में रहने वाले भारतीयों पर नहीं, बल्कि ग्लोबल ग्राहकों के बीच एक मजबूत ब्रांड तैयार करने पर है.

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