पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने नेशनल पेंशन सिस्टम के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब तक जो निवेशक शेयर बाजार में अपना पूरा पैसा लगाना चाहते थे, वे ऐसा नहीं कर पाते थे. लेकिन नए मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के जरिए अब प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी तथा सेल्फएंप्लॉयड लोग अपने एनपीएस फंड का 100 प्रतिशत हिस्सा सीधे इक्विटी में निवेश कर सकते हैं. ये फैसला उन लोगों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है जो लंबे समय तक निवेश कर मोटा फंड बनाना चाहते हैं.

कैसे काम करेगा नया नियम?
नए नियमों के मुताबिक, 100 प्रतिशत इक्विटी एलोकेशन का फायदा ‘हाईरिस्क वेरिएंट’ वाली योजनाओं के तहत दिया जाएगा. सबसे खास बात ये है कि अब निवेशकों को एक ही पर्मानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर पर अलगअलग पेंशन फंड मैनेजर्स की मल्टीपल स्कीम्स चुनने की आजादी मिलेगी. फिलहाल ये सुविधा कॉर्पोरेट कर्मचारियों, सेल्फएंप्लॉयड तथा आम नागरिकों के लिए ही उपलब्ध है. इससे पहले, एक्टिव चॉइस के तहत प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों को इक्विटी में अधिकतम 75 प्रतिशत एलोकेशन की ही अनुमति थी. अब इस सीमा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.
किन निवेशकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
शेयर बाजार में पैसा लगाने का सबसे बड़ा उसूल यही है कि आपका नजरिया लंबा होना चाहिए. इसलिए 20 से 35 साल की उम्र वाले निवेशकों के लिए ये नया नियम बहुत फायदेमंद साबित होने वाला है. इस उम्र के लोगों के पास निवेश करने के लिए कई साल होते हैं. शुरुआती सालों में 100 प्रतिशत पैसा इक्विटी में रखने से उन्हें कंपाउंडिंग की ताकत का पूरा लाभ मिलेगा. इसके अलावा जो निवेशक बाजार के उतारचढ़ाव से घबराते नहीं हैं, वे म्यूचुअल फंड्स की तरह ही एनपीएस से भी एग्रेसिव रिटर्न निकाल सकते हैं.
100 फीसदी शेयर में निवेश में क्या है जोखिम
बाजार में रिटर्न जितना ज्यादा होता है, जोखिम भी उसी अनुपात में बढ़ता है. शेयर बाजार में किसी भी वजह से भारी गिरावट आने पर पेंशन फंड की वैल्यू अचानक तेजी से गिर सकती है. अगर कोई निवेशक रिटायरमेंट के करीब है , तो उसे 100 फीसदी इक्विटी में रहने से बचना चाहिए. ऐसे समय में अगर मार्केट क्रैश होता है, तो उसका जिंदगी भर जोड़ा गया रिटायरमेंट कॉर्पस काफी कम हो सकता है.
एक्सपर्ट्स की राय क्या है?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स साफ तौर पर मानते हैं कि 100 प्रतिशत इक्विटी का विकल्प करियर के शुरुआती दौर वाले युवाओं के लिए एक शानदार ‘वेल्थबिल्डिंग टूल’ है. लेकिन समझदारी इसी में है कि जैसेजैसे उम्र बढ़े, इक्विटी में अपना एलोकेशन कम कर दिया जाए. उम्र के एक पड़ाव के बाद निवेश को धीरेधीरे डेट या सरकारी सिक्योरिटीज में शिफ्ट कर देना चाहिए. ऐसा करने से बाजार के जोखिम कम हो जाते हैं, साथ ही आपकी जमा की गई पूंजी भी पूरी तरह सुरक्षित रहती है.



