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सोने के दाम आसमान पर, फिर भी कैसे करोड़ों छाप रहीं ज्वेलरी कंपनियां?

सोने की बढ़ती कीमतों ने भारत के 7 लाख करोड़ रुपये के ज्वेलरी बाजार का पूरा गणित बदल दिया है. आमतौर पर महंगाई बढ़ने से बिक्री घटती है, लेकिन गहनों के बाजार में एक अलग ही ट्रेंड दिख रहा है. ग्राहक अब पहले के मुकाबले कम ग्राम सोना खरीद रहे हैं. इसके बावजूद ज्वेलरी कंपनियों के रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल आ रहा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में सोने की मांग में 17.1 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन खर्च की गई कुल रकम 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये हो गई. ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार अब ज्यादा ग्राम सोना बेचने पर नहीं, बल्कि प्रति ग्राम ज्यादा वैल्यू हासिल करने पर टिका है.

कम बिक्री के बावजूद कंपनियों का बंपर मुनाफा

टाइटन के ज्वेलरी बिजनेस ने जून तिमाही में 43 फीसदी की छलांग लगाई है. वहीं कल्याण ज्वेलर्स के रेवेन्यू में भी 46 फीसदी का तगड़ा उछाल दिखा है. केयरएज रेटिंग्स के निदेशक अखिल गोयल का कहना है कि महंगे सोने के कारण वॉल्यूम पर दबाव जरूर है, लेकिन ग्राहकों का खर्च करने का जज्बा कायम है. लोग अब 22 कैरेट के भारी भरकम गहनों के बजाय कम कैरेट वाले फैशनेबल उत्पादों की तरफ जा रहे हैं.

पुराना सोना बना कमाई का नया जरिया

महंगे आयातित सोने से बचने के लिए कंपनियां नई रणनीतियां अपना रही हैं. कल्याण ज्वेलर्स इसका बड़ा उदाहरण है. इस कंपनी की कुल कमाई में रिसाइकल्ड सोने की हिस्सेदारी 46 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है. कंपनी ने मई में ‘शाइन विद इंडिया’ अभियान शुरू किया था. इसके तहत पुराने गहनों को नए डिजाइन में बदला जा रहा है. ये रणनीति आयात पर निर्भरता कम करने के साथ ही बिजनेस को ज्यादा मजबूत बना रही है.

युवाओं को लुभा रहे आधुनिक डिजाइन

नई पीढ़ी की सोच पारंपरिक निवेश से काफी अलग है. युवा अब भारी गहनों के बजाय रोजाना पहनने लायक लाइटवेट ज्वेलरी ज्यादा पसंद कर रहे हैं. सेनको गोल्ड 9 कैरेट से लेकर 14 कैरेट तक के कलेक्शन पर फोकस कर रहा है. साथ ही पुरुषों के लिए 20 हजार से एक लाख रुपये तक की टाइटेनियम ज्वेलरी भी पेश की गई है. सीबीआरई की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि लैबग्रोन डायमंड्स अब युवाओं के बीच ‘एक्सेसिबल लग्जरी’ बन चुके हैं. ग्राहक 14K या 18K के गहनों में डायमंड जड़वाकर कम कीमत में शानदार डिजाइन पा रहे हैं.

सुनार के भरोसे की जगह ले रहे बड़े ब्रांड्स

एक समय था जब लोग सिर्फ अपने खानदानी सुनार से ही गहने खरीदते थे. अब ये चलन भी पीछे छूट रहा है. 2025 तक ज्वेलरी रिटेल लीजिंग में बड़े शोरूम की हिस्सेदारी बढ़कर 50 फीसदी हो गई. हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से असंगठित बाजार का दबदबा कम हुआ है. अब लोग शुद्धता की गारंटी, पारदर्शी कीमत के साथ बेहतर खरीदारी का अनुभव चाहते हैं. ब्रांडेड शोरूम उन्हें ये सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे दे रहे हैं.

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