नई दिल्ली। देश में चावल की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दोतीन हफ्तों में कई किस्मों के चावल के खुदरा दाम में करीब 15 फीसदी तक उछाल दर्ज किया गया है। इसके बावजूद भारतीय चावल का निर्यात मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत से बासमती और गैरबासमती चावल का कुल निर्यात 47.9 लाख टन और करीब 23,476 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह अवधि बीते तीन वर्षों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन वाली रही।
प्रीमियम बासमती चावल के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं। कई बाजारों में इसका भाव 85 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं, साधारण और परमल चावल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है।
उधर, दलहन किसानों को राहत देने के लिए नैफेड और एनसीसीएफ देशभर में 500 नए खरीद केंद्र खोलने की तैयारी में हैं। इन केंद्रों पर किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अरहर, चना और उड़द जैसी प्रमुख दालों की सीधी खरीद की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और खरीदबिक्री की परेशानियों को कम करना है।
खरीफ सीजन की दालें जल्द बाजार में आने वाली हैं, ऐसे में सरकार की यह पहल किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बाजार में चावल महंगा होने के बावजूद निर्यात की रफ्तार और दाल खरीद के लिए नए केंद्र खोलने की तैयारी ने कृषि और खाद्य बाजार को एक साथ चर्चा में ला दिया है।


