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Fermented Garlic Benefits: तीखा कच्चा लहसुन नहीं खा पाते? जानें फर्मेंटेड लहसुन बनाने का तरीका, BP और हार्ट हेल्थ पर असर,,​​​​​​

लहसुन भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला ऐसा मसाला है, जिसे सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि पारंपरिक रूप से सेहत के लिए भी उपयोग किया जाता रहा है। इसमें कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं, जिन पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े संभावित फायदों को लेकर अध्ययन हुए हैं।

हालांकि, कच्चे लहसुन का तीखा स्वाद और तेज गंध हर किसी को पसंद नहीं आती। कुछ लोगों को इसे खाने के बाद मुंह में जलन, एसिडिटी, डकार, पेट में परेशानी या मतली भी महसूस हो सकती है। ऐसे में फर्मेंटेड लहसुन एक विकल्प के रूप में सामने आता है।

आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, फर्मेंटेशन के बाद लहसुन का स्वाद और गंध अपेक्षाकृत हल्की हो सकती है और इसका टेक्सचर भी नरम हो जाता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या नसों की ब्लॉकेज खोलने वाला उपाय मानना सही नहीं है।

लहसुन में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं?

लहसुन में सल्फर युक्त कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। लहसुन को काटने या कुचलने पर कुछ सक्रिय यौगिक बनते हैं, जिन पर वैज्ञानिक अध्ययनों में एंटीऑक्सीडेंट और अन्य जैविक प्रभाव देखे गए हैं।

कुछ शोधों में लहसुन के सेवन और ब्लड प्रेशर में मामूली सुधार के बीच संबंध पाया गया है। इसी तरह कुछ लोगों में कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लहसुन हाई BP, हाई कोलेस्ट्रॉल या हार्ट डिजीज की दवाओं का विकल्प है।

कच्चा लहसुन खाने में क्यों होती है परेशानी?

कच्चे लहसुन का स्वाद काफी तीखा होता है। कुछ लोगों में इसे खाने के बाद:

  • मुंह या गले में जलन
  • एसिडिटी
  • डकार
  • पेट में जलन
  • गैस या पेट की असहजता
  • मतली

जैसी समस्या हो सकती है।

खासकर संवेदनशील पेट या एसिडिटी की समस्या वाले लोगों को कच्चा लहसुन खाली पेट खाने से परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।

इसलिए केवल इस सोच से कि कच्चा लहसुन ज्यादा फायदेमंद है, उसे जबरदस्ती खाना जरूरी नहीं है।

फर्मेंटेड लहसुन क्या होता है?

फर्मेंटेड लहसुन वह लहसुन है जिसे नियंत्रित परिस्थितियों में नमक वाले घोल या अन्य फर्मेंटेशन प्रक्रिया के जरिए रखा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सूक्ष्मजीवों की गतिविधि से लहसुन के स्वाद, गंध और टेक्सचर में बदलाव आ सकता है।

फर्मेंटेशन के बाद लहसुन का स्वाद अपेक्षाकृत कम तीखा और कुछ मामलों में हल्का मीठा लग सकता है। इसकी बनावट भी नरम हो जाती है।

कुछ अध्ययनों में फर्मेंटेड या aged garlic preparations में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि बढ़ने की संभावना देखी गई है। हालांकि, अलग-अलग प्रकार के फर्मेंटेड लहसुन की प्रक्रिया और संरचना अलग हो सकती है, इसलिए हर घरेलू तैयारी को समान प्रभाव वाला नहीं माना जा सकता।

क्या फर्मेंटेड लहसुन नसों की ब्लॉकेज खोल देता है?

यह दावा अक्सर सोशल मीडिया और घरेलू नुस्खों में सुनने को मिलता है, लेकिन इसे लेकर सावधानी जरूरी है।

फर्मेंटेड लहसुन को खाने से नसों में जमा प्लाक या ब्लॉकेज खत्म हो जाती है, ऐसा साबित करने के लिए पर्याप्त मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

इसी तरह यह कहना भी सही नहीं होगा कि फर्मेंटेड लहसुन कच्चे लहसुन से कई गुना ज्यादा असरदार है। हृदय रोग या ब्लॉकेज होने पर डॉक्टर की जांच और प्रमाणित उपचार जरूरी है।

क्या लहसुन ब्लड प्रेशर में मदद कर सकता है?

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में लहसुन से बने कुछ सप्लीमेंट या तैयारियों के सेवन से ब्लड प्रेशर में मामूली कमी देखी गई है। हालांकि, इसका प्रभाव व्यक्ति और इस्तेमाल की गई तैयारी के अनुसार अलग हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को हाई BP है, तो लहसुन को दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई BP की दवा खुद से बंद करना नुकसानदायक हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थ पर क्या असर?

लहसुन में मौजूद कुछ बायोएक्टिव कंपाउंड शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े रास्तों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ शोधों में लहसुन की तैयारियों से कुल कोलेस्ट्रॉल और LDL में मामूली कमी देखी गई है।

हालांकि, इसका प्रभाव सीमित हो सकता है और हर व्यक्ति में एक जैसा परिणाम नहीं मिलता।

हार्ट हेल्थ के लिए लहसुन के साथ संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, वजन नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और BP व कोलेस्ट्रॉल की निगरानी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

घर पर फर्मेंटेड लहसुन बनाने में क्यों बरतें सावधानी?

फर्मेंटेशन सिर्फ लहसुन को नमक वाले पानी में लंबे समय तक रखने का नाम नहीं है। सही नमक की मात्रा, तापमान, स्वच्छता और फर्मेंटेशन की परिस्थितियां खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।

घर पर फर्मेंटेड लहसुन बनाते समय साफ जार और साफ सामग्री का इस्तेमाल करें। लहसुन को फर्मेंटेशन के दौरान पूरी तरह सुरक्षित परिस्थितियों में रखना जरूरी है।

यदि तैयारी में फफूंद दिखाई दे, असामान्य सड़न जैसी गंध आए या लहसुन खराब नजर आए, तो उसे खाने की बजाय फेंक देना बेहतर है।

फर्मेंटेड लहसुन खाते समय कितनी मात्रा रखें?

पहली बार फर्मेंटेड लहसुन खाने वालों को छोटी मात्रा से शुरुआत करना बेहतर हो सकता है। अगर इससे पेट में परेशानी, जलन या एलर्जी जैसी समस्या नहीं होती, तभी सामान्य भोजन के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।

इसे खाली पेट खाना जरूरी नहीं है। जिन लोगों को एसिडिटी या संवेदनशील पेट की समस्या होती है, वे इसे भोजन के साथ लेने पर बेहतर तरीके से सहन कर सकते हैं।

किन लोगों को लहसुन खाने में सावधानी बरतनी चाहिए?

कुछ लोगों को लहसुन का सेवन करते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

Blood Thinner लेने वाले लोग

लहसुन में प्लेटलेट्स के कामकाज पर प्रभाव डालने की क्षमता हो सकती है। इसलिए जो लोग वारफरिन, एपिक्साबैन, रिवरॉक्साबैन, क्लोपिडोग्रेल या अन्य खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, उन्हें अधिक मात्रा में लहसुन या लहसुन के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सर्जरी से पहले

अगर आपकी सर्जरी होने वाली है और आप नियमित रूप से लहसुन के सप्लीमेंट या अधिक मात्रा में लहसुन लेते हैं, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें।

संवेदनशील पेट वाले लोग

जिन लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन या लहसुन खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी होती है, उन्हें कच्चा या अधिक मात्रा में लहसुन लेने से बचना चाहिए।

एलर्जी होने पर

अगर लहसुन खाने के बाद खुजली, चेहरे या गले में सूजन, सांस लेने में परेशानी या अन्य एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, तो इसका सेवन बंद करके तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

हार्ट हेल्थ के लिए सिर्फ लहसुन पर निर्भर न रहें

अगर आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है।

हार्ट हेल्थ के लिए:

  • नमक का सेवन सीमित रखें।
  • सब्जियां और फल पर्याप्त मात्रा में खाएं।
  • साबुत अनाज और फाइबर को डाइट में शामिल करें।
  • जरूरत के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • धूम्रपान से दूरी बनाएं।
  • शराब का सेवन न करना या सीमित रखना बेहतर है।
  • BP, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं बिना सलाह बंद न करें।

निष्कर्ष

लहसुन एक पौष्टिक और बायोएक्टिव कंपाउंड से भरपूर खाद्य पदार्थ है। कुछ शोधों में इसके सेवन से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कारकों पर संभावित लाभ देखे गए हैं। फर्मेंटेशन के बाद इसका स्वाद और गंध हल्की हो सकती है और कुछ एंटीऑक्सीडेंट गुणों में बदलाव देखा जा सकता है।

लेकिन फर्मेंटेड लहसुन को हार्ट डिजीज, हाई BP या नसों की ब्लॉकेज का इलाज समझना सही नहीं है। अगर आपको पहले से हृदय रोग, हाई BP, हाई कोलेस्ट्रॉल या ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी समस्या है, तो किसी भी घरेलू नुस्खे या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है और चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। फर्मेंटेड लहसुन किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं है। यदि आप ब्लड थिनर, BP या अन्य नियमित दवाएं लेते हैं, किसी सर्जरी की तैयारी कर रहे हैं या आपको हृदय संबंधी बीमारी है, तो लहसुन की अधिक मात्रा या सप्लीमेंट लेने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

contact.satyareport@gmail.com

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