India

कार खरीदने से पहले माइलेज ही नहीं, ये चीज भी जरूर देखें! खराब सड़कों पर आएगी काम

नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो जाहिर है, आपके दिमाग में सबसे पहले माइलेज, इंजन, फीचर्स और कीमत जैसी बातें आती होंगी. लेकिन कार खरीदते समय एक और चीज पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, और अक्सर लोग इसे भूल जाते हैं. यह है ग्राउंड क्लीयरेंस.भारत में सड़कें हर जगह एक जैसी नहीं हैं.कहीं ऊंचे स्पीड ब्रेकर हैं तो कहीं बड़ेबड़े गड्ढे. गांवों और छोटे शहरों में कई जगह सड़कें टूटी हुई या कच्ची भी मिल जाती हैं. ऐसे में कार का ग्राउंड क्लीयरेंस अच्छा होना काफी काम आता है.

ग्राउंड क्लीयरेंस आखिर है क्या?

इसे बहुत आसान तरीके से समझिए. कार के नीचे का सबसे निचला हिस्सा और सड़क के बीच जितनी दूरी होती है, उसे ग्राउंड क्लीयरेंस कहते हैं. मान लीजिए किसी कार का ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा है, तो गड्ढे या ऊंचे स्पीड ब्रेकर आने पर उसके नीचे का हिस्सा जमीन से टकराने की संभावना कम होगी. वहीं, कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार को ऐसे रास्तों पर चलाते समय ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है.

अगर कार का निचला हिस्सा बारबार सड़क से टकराए, तो नीचे लगे कुछ जरूरी पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है. इससे बाद में मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है.

भारतीय सड़कों के लिए कितना ग्राउंड क्लीयरेंस ठीक है?

भारत में आम तौर पर 170 से 200 मिलीमीटर के आसपास का रोजमर्रा की खराब सड़कों के लिए अच्छा माना जाता है. हालांकि, आपकी जरूरत और कार के डिजाइन के हिसाब से यह आंकड़ा अलग हो सकता है.आमतौर पर सेडान कारों का ग्राउंड क्लीयरेंस एसयूवी या कई कॉम्पैक्ट एसयूवी की तुलना में कम होता है. इसलिए बड़े स्पीड ब्रेकर या खराब सड़कों पर सेडान के नीचे का हिस्सा टकराने की संभावना बढ़ सकती है.यही वजह है कि गांव, छोटे शहरों और खराब सड़कों वाले इलाकों में लोग अक्सर ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कारों को पसंद करते हैं.

सिर्फ ग्राउंड क्लीयरेंस का नंबर देखकर कार न खरीदें

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कार का ग्राउंड क्लीयरेंस कितना है.कार की सस्पेंशन सेटिंग, टायर का साइज, व्हीलबेस और कार के आगेपीछे का डिजाइन भी खराब सड़क पर उसके प्रदर्शन को प्रभावित करता है.दो कारों का ग्राउंड क्लीयरेंस एक जैसा हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि दोनों कारें गड्ढों और स्पीड ब्रेकर पर एक जैसा प्रदर्शन करें. इसलिए सिर्फ कंपनी के बताए नंबर पर भरोसा करने के बजाय कार को चलाकर देखना बेहतर रहता है.

गांव और खराब सड़कों पर क्यों ज्यादा जरूरी है?

अगर आपका ज्यादातर सफर गांव, कस्बे या ऐसे इलाके में होता है जहां सड़कें टूटी हुई हैं, तो ग्राउंड क्लीयरेंस को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा.ऐसे रास्तों पर ऊंचे स्पीड ब्रेकर, पत्थर, गड्ढे और सड़क की ऊंचनीच आम बात है. ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार इन रास्तों पर नीचे से टकराने के खतरे को कम कर सकती है. छोटी कारों में भी अच्छे ग्राउंड क्लीयरेंस का फायदा मिलता है.

कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर करें

कार की वेबसाइट या ब्रोशर में दिए गए आंकड़े देखना जरूरी है, लेकिन फैसला सिर्फ उन्हीं नंबरों के आधार पर न लें.कार खरीदने से पहले जरूर करें. कोशिश करें कि कार को अलगअलग तरह की सड़क पर चलाकर देखें. स्पीड ब्रेकर, हल्के गड्ढे और खराब सड़क पर कार कैसी चलती है, इसका अंदाजा आपको खुद हो जाएगा.

आखिरकार, सबसे अच्छी कार वही है जो आपके इस्तेमाल और आपके इलाके की सड़कों के हिसाब से सही बैठे. इसलिए माइलेज और फीचर्स के साथ ग्राउंड क्लीयरेंस को भी अपनी कार खरीदने की लिस्ट में जरूर शामिल करें.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply