अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुई एक बड़ी तेल डील ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. ट्रंप ने इसे दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया है.

इस समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 रणनीतिक तेल क्षेत्रों में काम किया जाना है. अमेरिका ने कहा है कि वह तेल निकालने के लिए एक निजी कंपनी के साथ मिलकर काम करेगा. हालांकि, इस डील की कई अहम शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञों और आलोचकों के बीच कई सवाल भी उठ रहे हैं.
सवाल ये है कि तनाव के बावजूद अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में सुधार कैसे आया? 65 अरब बैरल तेल कितना बड़ा भंडार है? यह तेल भंडार अमेरिका के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है और उसे फायदा होगा? अमेरिका को कितने साल तेल निकालने का अधिकार रहेगा? इस डील का दुनिया पर क्या असर होगा? आज के एक्सप्लेनर में जानते हैं इन्हीं सवालों के जवाब….
65 अरब बैरल तेल कितना बड़ा भंडार है?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 तक वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल तेल का भंडार था. ऐसे में 65 अरब बैरल उसके कुल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है. दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17 फीसदी हिस्सा भी वेनेजुएला में होने का अनुमान है. हालांकि, कुछ तेल विशेषज्ञों ने ट्रंप के बताए 65 अरब बैरल के आंकड़े पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि डील की पूरी शर्तें सामने नहीं आई हैं, इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि वास्तव में अमेरिका को कितने तेल भंडार पर अधिकार मिलेगा और किस तरह मिलेगा.
अमेरिका को इस डील से क्या फायदा होगा?
ट्रंप का कहना है कि इस समझौते से अमेरिका के तेल भंडार में काफी बढ़ोतरी होगी. अमेरिका के अपने तेल भंडार 2024 के अंत तक करीब 46 अरब बैरल थे. अमेरिका के पास आपात स्थिति के लिए एक बड़ा स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी है. इसका इस्तेमाल तेल की सप्लाई में बड़ी परेशानी होने पर किया जाता है. लेकिन इस रिजर्व में फिलहाल करीब 28.97 करोड़ बैरल तेल है, जबकि इसकी क्षमता करीब 71.4 करोड़ बैरल की है. ट्रंप का दावा है कि वेनेजुएला से मिलने वाला तेल अमेरिका की सप्लाई को मजबूत करेगा और देश में पेट्रोलडीजल की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है.
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते कैसे बदले?
इस डील को समझने के लिए अमेरिका और वेनेजुएला के पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम को समझना जरूरी है. वेनेजुएला लंबे समय तक राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व में रहा. मादुरो और ट्रंप के बीच काफी समय से तनाव था. अमेरिका ने मादुरो पर कई गंभीर आरोप लगाए, जबकि मादुरो सरकार अमेरिका पर अपने देश के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाती रही. 3 जनवरी को दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया. अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो को हिरासत में लिया गया और अब वह न्यूयॉर्क में ड्रग्स और हथियारों से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने मादुरो की पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर समर्थन दिया. इसके साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर भी अपना नियंत्रण बढ़ाया.
अमेरिका क्यों जताता है वेनेजुएला के तेल पर अधिकार?
अमेरिका के इस दावे की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश को अपने प्राकृतिक संसाधनों पर स्थायी अधिकार प्राप्त होता है. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल को लेकर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश की है. अमेरिका का कहना रहा है कि वेनेजुएला ने पहले अमेरिकी कंपनियों के तेल संसाधनों का राष्ट्रीयकरण किया था. ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों को लेकर पहले भी कई कड़े बयान दिए हैं. अमेरिका का तर्क है कि वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया गया था.
अभी यह डील क्यों हुई?
इस डील का समय भी काफी महत्वपूर्ण है. ईरान के साथ युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर तनाव के कारण दुनिया के तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है. हॉर्मुज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. दुनिया की करीब 5वीं तेल और प्राकृतिक गैस सप्लाई इस रास्ते से गुजरती रही है. वहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ा है. अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं. इसी साल नवंबर में वहां मध्यावधि चुनाव होने हैं और महंगाई व रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला से मिलने वाले तेल को अमेरिका में पेट्रोल की कीमत कम करने और अर्थव्यवस्था को राहत देने के तरीके के तौर पर पेश कर रहा है.
वेनेजुएला को क्या फायदा होगा?
वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताया है. उनका कहना है कि इससे देश के तेल उद्योग में बड़ा निवेश आएगा और अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में मदद मिलेगी. वेनेजुएला पिछले कई साल से गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. वहां महंगाई, जरूरी सामान की कमी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं रही हैं. 2014 के बाद करीब 80 लाख लोग देश छोड़ चुके हैं, ऐसा विभिन्न अनुमानों में बताया गया है. सरकार का दावा है कि नई डील से वेनेजुएला को करीब 209 अरब डॉलर टैक्स के रूप में मिल सकते हैं. इसके अलावा करीब 100 अरब डॉलर का निवेश भी आने की उम्मीद है.
डील कितने समय तक चलेगी?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वेनेजुएला की सरकार ने अमेरिका को इन तेल भंडारों का इस्तेमाल करीब 100 साल तक करने का अधिकार दिया है. हालांकि, डील की पूरी कानूनी और व्यावसायिक शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं. यही वजह है कि इस समझौते को लेकर वेनेजुएला में भी सवाल उठ रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर इतना लंबा विदेशी नियंत्रण उसकी संप्रभुता के लिए चिंता का विषय हो सकता है.
क्या दूसरे देशों पर भी लागू हो सकता है यह मॉडल?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका भविष्य में दूसरे तेल उत्पादक देशों के साथ भी ऐसा मॉडल अपना सकता है. ट्रंप पहले भी दूसरे देशों के तेल संसाधनों को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं. ईरान के मामले में भी उन्होंने तेल और हॉर्मुज को लेकर इसी तरह की बातें कही हैं. इसलिए वेनेजुएला की यह डील सिर्फ दो देशों के बीच तेल समझौता नहीं मानी जा रही है. इसे अमेरिका की बदलती विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और दुनिया के तेल बाजार में उसके प्रभाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है.


