
लखनऊ, अमृत विचार: अगर आपने आयुष्मान योजना के तहत किसी अस्पताल में इलाज कराया है, तो आने वाले समय में आपके पास फोन आ सकता है। फोन पर आपसे पूछा जाएगा कि इलाज कैसा मिला, अस्पताल में किसी तरह की परेशानी हुई या नहीं और कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा। इतना ही नहीं, आपसे यह भी पूछा जाएगा कि इलाज के बदले आपसे कोई अतिरिक्त या अनधिकृत पैसा तो नहीं लिया गया।
योगी सरकार अब मरीजों के अनुभव के जरिए अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी मजबूत करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोडल स्टेट हेल्थ एजेंसी ‘साचीज’ आयुष्मान कार्डधारकों और उनके तीमारदारों के लिए एआई आधारित वॉयस बॉट तैयार कर रही है। इसका इस्तेमाल इलाज करा चुके मरीजों से फोन पर फीडबैक लेने के लिए किया जाएगा।
आपके अनुभव से पता चलेगी अस्पताल की हकीकत
एआई वॉयस बॉट के जरिए मरीजों से कई सवाल पूछे जाएंगे। उनसे यह जानने की कोशिश होगी कि उन्हें आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं। इलाज के दौरान कोई परेशानी हुई या नहीं, अस्पताल की सेवाएं कैसी थीं और कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा, इसकी जानकारी भी ली जाएगी।
इसके अलावा मरीज या उसके परिवार से यह भी पूछा जाएगा कि इलाज के लिए उनसे कोई अनधिकृत राशि तो नहीं ली गई। इलाज के बाद मरीज अस्पताल की सेवा से कितना संतुष्ट है, इसका फीडबैक भी लिया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के मुताबिक, इस व्यवस्था से मरीजों की वास्तविक परेशानी और अस्पतालों में मिलने वाली सेवाओं की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
हजारों मरीजों के जवाब को AI करेगा स्कैन
सिर्फ मरीजों से फीडबैक लेना ही इस व्यवस्था का उद्देश्य नहीं है। बड़ी संख्या में मिलने वाले जवाबों का एआई के जरिए विश्लेषण किया जाएगा। इससे ऐसी शिकायतों को अलग करना आसान होगा, जिन पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।
अगर किसी मरीज को आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं मिला, उससे अतिरिक्त शुल्क लिया गया, कर्मचारियों का व्यवहार खराब रहा या अस्पताल की सेवा में कोई गंभीर कमी सामने आई, तो ऐसे मामलों को संबंधित टीम तक पहुंचाया जा सकेगा।
अस्पताल की निगरानी में मरीज की आवाज भी शामिल
अब तक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी में आंकड़ों और रिपोर्ट की बड़ी भूमिका रहती है। नई व्यवस्था में मरीज का अपना अनुभव भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा। यानी अस्पताल में इलाज के बाद मरीज ने क्या महसूस किया, उसे सीधे व्यवस्था तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, एआई आधारित सिस्टम का मकसद फीडबैक को केवल रिकॉर्ड करना नहीं, बल्कि उसमें से कार्रवाई योग्य मामलों की पहचान करना है।
आयुष्मान मरीजों के लिए क्यों अहम है यह पहल?
आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी सीधे मरीजों से ली जाएगी। इलाज में परेशानी, अतिरिक्त पैसे की मांग या व्यवहार से जुड़ी शिकायत सामने आने पर उसे संबंधित स्तर तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सरकार का लक्ष्य केवल मरीज को इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर स्वास्थ्य सेवा दिलाना है। ऐसे में आने वाले समय में अस्पतालों की निगरानी में मरीज की आवाज एक अहम भूमिका निभा सकती है।
ः



