नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बड़ा चुनावी बदलाव सामने आया है। दिल्ली की कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाता आबादी में से लगभग 47.7 लाख नाम सोमवार को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इन नामों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य श्रेणियों में रखा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, घरघर जाकर किए गए सत्यापन अभियान के दौरान करीब 97.5 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटल रूप से दर्ज किया गया। इन्हीं मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
वहीं, करीब 47.7 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त नहीं होने के कारण उनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट रोल में नहीं होंगे। इनमें ऐसे मतदाता शामिल हो सकते हैं जो सत्यापन के दौरान अपने पते पर मौजूद नहीं थे, दिल्ली से कहीं और स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है अथवा जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज पाए गए हैं।
अब मतदाताओं के पास नाम जुड़वाने का मौका
चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। पात्र नागरिक 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं। इस अवधि में मतदाता अपना नाम सूची में शामिल कराने, गलत जानकारी में सुधार कराने या किसी अन्य आपत्ति को चुनाव अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। दावेआपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जांच की जाएगी और इसके आधार पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक अहमियत
दिल्ली में करीब 47.7 लाख नामों का ड्राफ्ट सूची से बाहर होना चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद कितने नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल होते हैं।


