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​पाकिस्तान में ढहाया गया 100 साल पुराना मंदिर, तो शंकराचार्य ने जताया रोष, कहा- हर धर्मस्थल की सुरक्षा जरूरी

मथुरा, अमृत विचार। पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाओं पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने रोष जताया है। उन्होंने कहा कि मंदिर चाहे 100 साल पुराना हो या हाल में बनाया गया हो, वह ईश्वर का घर होता है। दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी धर्मस्थल का अनादर निंदनीय है।

मथुरा में संवाददाताओं से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि भारत सरकार इस मामले का संज्ञान ले रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि पाकिस्तान सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं पर तत्काल रोक लग सके और वहां अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

धर्मस्थलों की सुरक्षा सभी देशों की जिम्मेदारी

शंकराचार्य ने वैश्विक सौहार्द और मानवीय व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि किसी एक देश में धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की प्रतिक्रिया में दूसरे देश में किसी अन्य धर्म के स्थल को निशाना बनाना सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाएंगे और उसके जवाब में भारत में मस्जिदों या किसी अन्य देश में चर्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा तो यह किसी भी सभ्य और मानवीय व्यवस्था का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैश्विक व्यवस्था का पालन करने की अपील की। शंकराचार्य ने कहा कि प्रत्येक देश को अपने यहां मौजूद सभी धर्मस्थलों का सम्मान करने के साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

धार्मिक भावनाओं का सम्मान जरूरी

शंकराचार्य ने कहा कि दुनिया के अलगअलग धर्मों को मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान और संरक्षण ही वास्तविक मानवीय व्यवस्था का आधार है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक मर्यादाएं सभी राष्ट्रों पर समान रूप से लागू होती हैं और इनका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

 

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