न्यूबॉर्न मदर की ये टेंशन रहती है कि वो अपने नवजात बच्चे या शिशु को क्या खिलाएं और क्या नहीं? इसमें सबसे बड़ा कंफ्यूजन शुगर को लेकर रहता है कि बच्चे को इसे कब से खिलाना शुरू करना चाहिए. यूएसए की प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस की नई स्टडी कहती है कि बच्चों को 2 साल तक शुगर न खिलाने से कई फायदे होते हैं. स्टडी के मुताबिक ये तरीका आगे चलकर वयस्कों में कैंसर के खतरे को भी कम कर सकता है. भारत में नई माएं अपने बच्चे को जन्म लेने के कुछ समय बाद ही दूध में शक्कर मिलाकर पिलाने लगती हैं.

इसका असर उम्र बढ़ने पर नजर आता है. लेकिन अगर आप अपने बच्चे के पैदा होने के बाद ही उसे कुछ समय तक सफेद चीनी से दूर रखते हैं तो इसके ढेरों फायदे मिलते हैं. जानें इस पर एक्सपर्ट की राय…
क्या कहती है ये रिसर्च?
पीएनएएस की रिसर्च कहती है कि अगर बच्चे की लाइफ के शुरुआती 1000 दिनों में उसे चीनी का सेवन न कराया जाए या कम कराया जाए तो इससे कैंसर होने का खतरा काफी कम हो सकता है. रिसर्चर्स ने ये रिजल्ट ब्रिटेन में हुई एक अनोखी ऐतिहासिक घटना के अध्ययन के आधार पर निकाला. दरअसल, सितंबर 1953 में ब्रिटेन में चीनी का राशन खत्म कर दिया गया था. इस दौरान लोगों की चीनी की खपत को सीमित करके अपेक्षाकृत स्वस्थ स्तर पर रखा गया था.
लेकिन जैसे ही सरकार ने ये प्रतिबंध हटाए, चीनी की खपत तुरंत लगभग दोगुनी हो गई. इस स्टडी में 64000 वयस्कों का हेल्थ डेटा कंपेयर किया गया. ये लोग चीनी की राशनिंग खत्म होने से ठीक पहले और उसके तुरंत बाद पैदा हुए थे. वैज्ञानिकों ने दोनों समूहों की लंबे समय की सेहत में काफी बड़ा अंतर पाया.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉक्टर विपिन चंद्र उपाध्याय कहते हैं कि चीनी कम खाने से बाद में टाइप 2 डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक बीमारी कम होती है. कैंसर का रिस्क कम होगा ऐसा हर मामले में एक जैसा नहीं है. वैसे इसका मतलब ये भी नहीं है कि बच्चे को बिल्कुल भी मीठा नहीं खिलाना चाहिए. डॉ विपिन के मुताबिक, बचपन से ही ज्यादा मीठा खाने की आदत आगे चलकर टाइप2 डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है. इन बीमारियों का संबंध मोटापा, शरीर में इंसुलिन के सही तरीके से काम न करने और लंबे समय तक ज्यादा कैलोरी लेने जैसी स्थितियों से भी हो सकता है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को जिंदगीभर मिठाई, चॉकलेट या दूसरी मीठी चीजें बिल्कुल नहीं खिलानी चाहिए. असली बात कितनी मात्रा और कितनी बार है. कभीकभार थोड़ी मात्रा में मीठा देना और रोजाना मीठे पेय, पैकेज्ड स्नैक्स या बहुत ज्यादा चीनी वाली चीजें देने में फर्क है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
मातापिता बच्चों को फल, दूध, दाल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन जैसे पौष्टिक विकल्प दें. साथ ही बच्चे को रोजाना शारीरिक गतिविधि की आदत डालना भी जरूरी है. यानी बच्चों की सेहत के लिए लक्ष्य मीठा पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उसकी आदत और मात्रा को नियंत्रित करना होना चाहिए.
पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. ब्रह्मानंद लाल ने बताया कि कम मात्रा में चीनी खाना सेहत के लिए फायदेमंद है. अगर बचपन में मीठा कम खाएं तो बाद में इसी तरह की हैबिट रहती है. जिससे कई बीमारियों का रिस्क कम होता है.



