अगर आपका सितंबर के महीने में बैंक से जुड़ा कोई बड़ा काम है, जैसे ड्राफ्ट बनवाना, चेक क्लीयरेंस या लोन डॉक्युमेंट्स जमा करना, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. United Forum of Bank Unions ने अपनी पुरानी मांगों को लेकर सितंबर में देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है.

यूएफबियू देश की लगभग 90% बैंक वर्कफोर्स का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसे में इस हड़ताल के चलते देश के पब्लिक, प्राइवेट, फॉरेन और ग्रामीण बैंकों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
सितंबर में कबकब बंद रहेंगे बैंक?
बैंक यूनियनों ने अपना आंदोलन तेज करते हुए नीचे दी गई तारीखों पर हड़ताल का प्लान बनाया है:
11 सितंबर 2026: 1 दिन की देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल.
28 से 30 सितंबर 2026: लगातार 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल.
26 अक्टूबर 2026 से: अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो यूनियनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है.
बता दें कि हड़ताल के दिनों में बैंक शाखाओं में कैश जमा/निकालना और चेक क्लीयरेंस रुक सकता है, हालांकि एटीएम और ऑनलाइन नेट बैंकिंग/यूपीआई सेवाएं चालू रहेंगी.
क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं बैंक कर्मचारी?
5डे बैंकिंग की मांग
बैंक कर्मचारी लंबे समय से सभी शनिवार को छुट्टी यानी 5डे बैंकिंग लागू करने की मांग कर रहे हैं. 8 मार्च 2024 को 12वें द्विपक्षीय समझौते में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन इस पर सहमति जता चुका है. प्रस्ताव यह है कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम किया जाए ताकि सभी शनिवार को अवकाश घोषित किया जा सके. यूनियनों का कहना है कि आरबीआई , एलआईसी और नाबार्ड में पहले से ही 5डे वर्क वीक लागू है. इसके बावजूद सरकार के पास यह फाइल पिछले दो सालों से मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है.
रिवाइज्ड PLI का विवाद
दूसरा बड़ा विवाद बैंक अधिकारियों के परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव के नए फॉर्मूले को लेकर है. बैंक के अच्छे प्रदर्शन पर सभी कर्मचारियों को 1 से 15 दिनों की सैलरी का बोनस/इंसेंटिव मिलता था. सरकार ने सीनियर अफसरों के लिए इंसेंटिव बढ़ाकर 365 दिनों तक की सैलरी का कर दिया है. यूनियनों का तर्क है कि इससे सिर्फ 5% सीनियर अफसरों को बंपर फायदा मिलेगा, जबकि बाकी 95% कर्मचारी वही पुराने 15 दिन के इंसेंटिव पर ही सीमित रह जाएंगे.
