इटावा:- लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां चुनाव आयोग के लिए कार्य कर रहे एक बीएलओ के साथ कथित तौर पर राजनीतिक दबाव, मारपीट और सरकारी दस्तावेजों की लूट की गई. आरोप है कि एक व्यक्ति ने खुद को भाजपा का पदाधिकारी बताकर अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दबाव बनाया.मना करने पर खुलेआम दबंगई दिखाई गई.
घायल बीएलओ अश्वनी कुमार ने चौबिया थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि सत्ता के नाम पर धमकाने वाले लोगों ने न सिर्फ उनके साथ मारपीट की, बल्कि निर्वाचन आयोग से जुड़े अहम कागजात भी जबरन छीन लिए.अश्वनी कुमार बकेवर थाना क्षेत्र के महेवा मड़ैया अहिरान के निवासी हैं और चौबिया रम्पुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं.वर्तमान में उनकी ड्यूटी एसआईआर बूथ संख्या 323, ग्राम मूंज में बीएलओ के रूप में लगी हुई है.
पीड़ित के अनुसार घटना मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे हुई, जब वह निर्वाचन आयोग के नोटिस घर-घर बांटकर लौट रहे थे.तभी पीछे से आई एक कार ने उनकी बाइक रुकवाई.कार सवार व्यक्ति ने खुद को भाजपा का पदाधिकारी बताते हुए अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का दबाव बनाया। बीएलओ द्वारा निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए इनकार किया गया, जिससे आरोपी बौखला गया.
आरोप है कि इसके बाद गाली-गलौज, कॉलर पकड़कर मारपीट शुरू कर दी गई. साथ मौजूद अन्य लोगों ने भी हाथापाई की और बाइक में रखे वोटर लिस्ट, नोटिस व अन्य चुनावी दस्तावेज छीन लिए। यह पूरी घटना चुनावी निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करती है.
मारपीट में बीएलओ घायल हो गए। जब उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के लिए मोबाइल फोन निकाला तो आरोपियों ने मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया.जाते-जाते जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे यह मामला सिर्फ दबाव नहीं बल्कि भय और आतंक फैलाने की कोशिश भी माना जा रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सत्ता से जुड़े होने का दावा करने वाले लोग अब खुलेआम चुनाव आयोग के कर्मचारियों को धमकाकर मतदाता सूची से नाम कटवाने की कोशिश कर रहे हैं? यदि आरोप सही हैं तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है.
फिलहाल पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है.हालांकि, राजनीतिक दबाव के इस गंभीर आरोप में अब तक किसी की गिरफ्तारी न होना भी सवालों के घेरे में है.



