मिडिल क्लास निवेशक अक्सर एक छोटा रेंटल फ्लैट खरीदने का सपना देखते हैं. लेकिन मेट्रो शहरों में बढ़ते प्रॉपर्टी रेट्स के कारण 20 से 30 लाख रुपये के बजट में अच्छी लोकेशन पर घर लेना लगभग नामुमकिन हो गया है. ऐसे में बाजार में रीट्स के रूप में एक मजबूत विकल्प मौजूद है. ये आपको लाखोंकरोड़ों की जमीन खरीदे बिना ही कमर्शियल संपत्तियों से कमाई का मौका देता है. अब बड़ा सवाल ये है कि इतने बजट में खुद का फ्लैट खरीदना फायदेमंद है या रीट्स में पैसा लगाना.

म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है REITs
म्यूचुअल फंड की तर्ज पर काम करने वाले रीट्स निवेशकों से पैसा जुटाते हैं. इस फंड का इस्तेमाल बड़े आईटी पार्क, मॉल से लेकर शानदार ऑफिस कॉम्प्लेक्स जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टीज में किया जाता है. अगर आपका बजट 20 से 30 लाख रुपये है, तो इतने में किसी भी बड़े शहर में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री से लेकर ब्रोकरेज का खर्च निकाल कर फ्लैट खरीदना बेहद मुश्किल है. वहीं REITs आपको छोटी रकम में इन बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टीज का मालिकाना हक दिलाते हैं. सेबी के सख्त नियमों के अनुसार रीट्स के लिए अपनी कमाई का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा निवेशकों के बीच डिविडेंड या ब्याज के रूप में बांटना अनिवार्य है. ये नियम निवेशकों की रेगुलर इनकम पक्की करता है.
रेंटल फ्लैट का जोखिम
एक छोटा रेंटल फ्लैट संपत्ति का अहसास कराता है. ये आपके सामने होता है. आप खुद तय करते हैं कि प्रॉपर्टी का किराएदार कौन होगा. किराया कब बढ़ाना है से लेकर भविष्य में इसे बेचने का फैसला पूरी तरह आपके हाथ में होता है. इलाके का विकास होने पर इसके दाम भी तेजी से बढ़ते हैं.
लेकिन इसकी कमियां भी कम नहीं हैं. भारत में आवासीय संपत्तियों से मिलने वाला सालाना रेंटल यील्ड बहुत कम है. ये आंकड़ा महज 1.5 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह जाता है. इसके साथ ही मेंटेनेंस का खर्च, प्रॉपर्टी टैक्स, टूटफूट की मरम्मत की जिम्मेदारी भी मकान मालिक की होती है. अगर कुछ महीने किराएदार न मिले, तो घर खाली पड़े रहने का आर्थिक नुकसान भी अलग से उठाना पड़ता है.
निवेश का सही विकल्प
अगर आप बिना मकान मालिक बने रियल एस्टेट का मुनाफा कमाना चाहते हैं तो REITs बेहतरीन विकल्प है. इसमें मेंटेनेंस की कोई सिरदर्दी नहीं होती. शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण इसमें लिक्विडिटी ज्यादा होती है, लेकिन आपको बाजार के उतारचढ़ाव झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा.
वहीं अगर आपके पास पर्याप्त पूंजी है, आपको स्थानीय रियल एस्टेट मार्केट की अच्छी समझ है, तो आप रेंटल फ्लैट की तरफ जा सकते हैं. बशर्ते आप लंबे समय तक किरायेदारों से जुड़ी चुनौतियों को संभालने के लिए मानसिक रूप से तैयार हों. बेहतर पोर्टफोलियो बनाने के लिए आप अपने पैसों को रीट्स के साथ फिजिकल प्रॉपर्टी दोनों में बांटकर लगा सकते हैं.



