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​भारतीय बाजारों पर फिर लौटा विदेशी निवेशकों का भरोसा! 60 दिनों में लगाए ₹50,000 करोड़

विदेशी निवेशक भारत लौट आए हैं और उनका पैसा तेजी से कंजम्पशनबेस्ड सेक्टर, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सेक्टर में लग रहा है. FIIs ने जुलाई और अगस्त में अलगअलग सेक्टर में कुल मिलाकर 49,830 करोड़ रुपए का निवेश किया, जिसमें से अकेले कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में कुल खरीदारी का एकतिहाई से ज्यादा हिस्सा गया. यह बदलाव तब आया है जब चिप का कारोबार धीमा हो रहा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान में सेमीकंडक्टर शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे निवेश का रुख भारत की ओर मुड़ रहा है. भारतीय इकोनॉमी की मजबूती, उम्मीद से बेहतर 7.8 फीसदी की Q1 FY27 GDP ग्रोथ रेट, उम्मीद से बेहतर Q1 की कमाई और रुपए में स्थिरता ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है.

​भारतीय बाजारों पर फिर लौटा विदेशी निवेशकों का भरोसा! 60 दिनों में लगाए ₹50,000 करोड़

कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा हुआ. इन दो महीनों में इसमें 18,618 करोड़ रुपए का FII निवेश आया. इसके बाद हेल्थकेयर सेक्टर में 13,686 करोड़ रुपए और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 11,245 करोड़ रुपए का निवेश आया. NSDL के डेटा के मुताबिक, फाइनेंशियल और IT सेक्टर में क्रमशः 9,800 करोड़ रुपए और 7,461 करोड़ रुपए का निवेश हुआ.

इन पांचों सेक्टर में कुल मिलाकर 60,810 करोड़ रुपए की खरीदारी हुई, जिसकी भरपाई बाजार के दूसरे हिस्सों में हुई बिकवाली से हो गई. यह डेटा बताता है कि निवेशक उन सेक्टर के बजाय घरेलू बाजार पर केंद्रित बिजनेस को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिनमें ज्यादा कैपिटल की जरूरत होती है, रेगुलेटरी अड़चनें हैं या निकट भविष्य में कैश फ़्लो कमजोर रहने की आशंका है.

इन सेक्टर्स पर विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा

  1. FII के लिए कंजम्पशन सबसे बड़ा दांव बनकर उभरा है : जुलाई में कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में ₹10,201 करोड़ और अगस्त में ₹8,417 करोड़ का निवेश आया, जिससे यह दो महीनों की अवधि में FII का सबसे मजबूत ट्रेड बन गया. SBI सिक्योरिटीज के अनुसार, यह खरीदारी खर्च करने के तरीकों में आए बड़े बदलाव को दिखाती है. ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम के कारण हाईएंड फैशन, लग्जरी कॉस्मेटिक्स और प्रीमियम ऑर्गनाइज्ड रिटेल में लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ी खरीदारी बढ़ रही है. लोगों की पसंद भी अब आरामदेह यात्रा, शानदार डाइनिंग और हॉस्पिटैलिटी की ओर बढ़ी है.
  2. हेल्थकेयर में ₹13,686 करोड़ का निवेश : FII निवेश के मामले में हेल्थकेयर दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर रहा. जुलाई में इसमें 7,755 करोड़ रुपए और अगस्त में 5,931 करोड़ रुपए का निवेश आया. SBI सिक्योरिटीज का कहना है कि निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स लगातार ऊंचे स्तर बना रहा है, जो मजबूत अपट्रेंड का संकेत है. निफ्टी के मुकाबले हेल्थकेयर इंडेक्स का बढ़ता अनुपात भी लगातार बेहतर प्रदर्शन का संकेत देता है, जबकि ADX खरीदारों का लगातार दबदबा दिखाता है.
  3. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का आकर्षण बरकरार :कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में जुलाई में 7,342 करोड़ रुपए और अगस्त में 3,903 करोड़ रुपए का निवेश आया, जिससे दो महीनों में कुल निवेश 11,245 करोड़ रुपए हो गया. इसने FII की खरीदारी सूची में इस सेक्टर को फाइनेंशियल्स, IT और मेटल्स से आगे पहुंचा दिया है. यह स्थिति घरेलू खपत और विवेकाधीन खर्च के साथसाथ कंज्यूमर सर्विसेज के प्रति व्यापक पसंद को मजबूत करती है.
  4. फाइनेंशियल सेक्टर की वापसी : फाइनेंशियल सेक्टर में दो महीनों के दौरान 9,800 करोड़ रुपए का निवेश आया, लेकिन निवेश मुख्य रूप से अगस्त में हुआ. जुलाई में इस सेक्टर से 694 करोड़ रुपए की निकासी हुई थी, जबकि अगस्त में 10,494 करोड़ रुपए का निवेश आया. SBI सिक्योरिटीज ने इस ट्रेंड को इस बात का संकेत बताया कि विदेशी निवेशक फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में वापस लौट रहे हैं. जून में FPI निवेश की वापसी और अगस्त में इसके जारी रहने से पता चलता है कि बिकवाली का दबाव कम हुआ है और निवेशक धीरेधीरे इस सेक्टर में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं.
  5. IT और मेटल्स में भी लगातार खरीदारी देखी गई : जुलाई में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में 3,358 करोड़ रुपए और अगस्त में 4,103 करोड़ रुपए का निवेश आया, जिससे दो महीनों में कुल निवेश 7,461 करोड़ रुपए हो गया. मॉर्गन स्टेनली ने IT सेवाओं को एक संभावित “डार्क हॉर्स” बताया, क्योंकि कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस एप्लिकेशन और समाधान बना रही हैं. मेटल्स सेक्टर में जुलाई में 4,937 करोड़ रुपए और अगस्त में 1,807 करोड़ रुपए का निवेश आया, जिससे कुल खरीदारी 6,744 करोड़ रुपए रही. जेफ़रीज ने मेटल्स को अपना पसंदीदा सेक्टर बताया, साथ ही लेंडर्स और रियलएसेट व इन्वेस्टमेंटसाइकिल से फ़ायदा उठाने वाले सेक्टर जैसे पावर, पोर्ट्स, हॉस्पिटल और रियल एस्टेट को भी प्राथमिकता दी.
  6. टेलीकॉम पर बिकवाली का सबसे ज्यादा असर : जबकि विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमरफेसिंग सेक्टर में जोरदार खरीदारी की, टेलीकॉम में दो महीने की अवधि में सबसे ज्यादा पैसा बाहर निकला. इस सेक्टर में जुलाई में 5,725 करोड़ रुपए और अगस्त में 4,983 करोड़ रुपए की बिकवाली हुई, जिससे कुल आउटफ्लो 10,708 करोड़ रुपए हो गया. SBI सिक्योरिटीज ने कहा कि पूरे भारत में 5G इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेक्ट्रम रिन्यूअल के लिए लगातार निवेश की जरूरतें निकटअवधि के फ्री कैश फ़्लो पर भारी पड़ रही हैं. वास्तविक 5G रेवेन्यू जेनरेशन अनुमान से धीमा रहा है.
  7. कैपिटल गुड्स, पावर और FMCG सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा कम : अगस्त में 606 करोड़ रुपए का निवेश मिलने के बावजूद, कैपिटल गुड्स सेक्टर से दो महीनों में कुल 5,669 करोड़ रुपए की निकासी हुई. जुलाई में इस सेक्टर में 6,275 करोड़ रुपए की बिकवाली हुई थी. पावर सेक्टर से कुल 4,416 करोड़ रुपए की निकासी हुई, जबकि FMCG सेक्टर में 2,544 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई. ऑयल और गैस सेक्टर से 2,016 करोड़ रुपए की निकासी हुई और ऑटो स्टॉक्स में 1,458 करोड़ रुपए की बिकवाली देखी गई.

विदेशी निवेश क्यों लौट रहा है?

FII का पैसा लौटने के पीछे घरेलू मज़बूती और ग्लोबल स्थिति में बदलाव जैसे कारण हैं. भारत की Q1 FY27 में 7.8% GDP ग्रोथ, उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही की कमाई और रुपए में स्थिरता ने विदेशी निवेश को फिर से आकर्षित करने में मदद की है. FCNR स्कीम के तहत भारत में आए 127 अरब रुपए ने भी रुपए को मई में डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से उबरने में मदद की.

ताज़ा सेक्टर डेटा से पता चलता है कि विदेशी निवेशक बिना सोचेसमझे निवेश नहीं कर रहे हैं. उनकी खरीदारी मुख्य रूप से कंजम्पशन, हेल्थकेयर, फाइनेंशियल्स, IT और मेटल्स सेक्टर में हो रही है, जबकि टेलीकॉम, कैपिटल गुड्स, पावर और कुछ कमोडिटीलिंक्ड सेक्टर पर दबाव बना हुआ है. फिलहाल, निवेश के आंकड़ों से साफ़ संदेश मिलता है: FII वापस आ गए हैं, लेकिन वे सोचसमझकर निवेश कर रहे हैं.

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