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​Donald Trump Investment: ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप के पोर्टफोलियो से बेचे-खरीदे गए एनर्जी शेयर, हुआ तगड़ा मुनाफा!

Donald Trump Investment: कच्चे तेल की कीमतों में आए जबर्दस्त उछाल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेयर पोर्टफोलियो को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. ईरान के साथ बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य कार्रवाइयों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. अमेरिका में पेट्रोलडीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मिडटर्म चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ रही हैं. दूसरी तरफ, राष्ट्रपति ट्रंप के इनवेस्टमेंट खातों ने पिछले छह महीनों के दौरान तेल और गैस कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग के जरिए लाखों डॉलर का भारी मुनाफा बटोरा है.

​Donald Trump Investment: ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप के पोर्टफोलियो से बेचे-खरीदे गए एनर्जी शेयर, हुआ तगड़ा मुनाफा!

सीएनबीसी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 फरवरी से 31 अगस्त के बीच ट्रंप के नौ बड़े एनर्जी होल्डिंग्स की कीमत में करीब 15 लाख डॉलर से 44 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है. ये वही समय था जब राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध संबंधी फैसलों से कच्चे तेल के बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही थी. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि ट्रंप ने खुद ये ट्रेड किए या उनके पास फैसलों की पहले से जानकारी के आधार पर सौदे कराए गए.

नौ बड़ी तेल कंपनियों में बड़ा निवेश

रिपोर्ट के मुताबिक, जब ईरान संकट शुरू हुआ, तब राष्ट्रपति ट्रंप का पैसा दुनिया की नौ दिग्गज तेल और गैस कंपनियों में लगा हुआ था. इनमें शेवरॉन, कोनोकोफिलिप्स, एक्सॉन मोबिल, किंडर मॉर्गन, मैराथन पेट्रोलियम, ऑक्सिडेंटल पेट्रोलियम, फिलिप्स 66, वलेरो एनर्जी और विलियम्स कंपनीज शामिल हैं. ट्रंप के खातों ने पूरे युद्ध के दौरान सक्रिय रूप से सौदे किए. 29 जून तक के सार्वजनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि इन कंपनियों में कई बार खरीदारी हुई और कम से कम 23 बार शेयर बेचे गए.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगले ने किसी भी तरह के हितों के टकराव के आरोप को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप या उनका परिवार इन खातों को न तो संभालता है और न ही इसमें कोई दखल दे सकता है. सभी फैसले स्वतंत्र फंड मैनेजर और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए लिए जाते हैं.

अहम फैसलों वाले दिन भी हुए सौदे

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान कुछ खास तारीखों पर हुए सौदों की टाइमिंग ने खींचा है. 2 मार्च को, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई की, उसके ठीक अगले कारोबारी दिन ट्रंप के खातों ने आठ बड़ी तेल कंपनियों के शेयर खरीदे. इसमें अकेले एक्सॉन मोबिल के 1 लाख से 2.5 लाख डॉलर के शेयर शामिल थे.

इसके बाद 23 मार्च को एक और बड़ा वाकया हुआ. बाजार खुलने से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर हमला टालने की बात कही. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 11 फीसदी गिर गईं. ठीक उसी दिन ट्रंप के खातों से तेल कंपनियों के 16 खरीद सौदे दर्ज किए गए, लेकिन एक भी शेयर नहीं बेचा गया. इसी तरह 7 अप्रैल को जब ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा की, उससे दो घंटे पहले उनके खाते से एक्सॉन के 5 लाख से 10 लाख डॉलर तक के शेयर बेचे गए थे. अगली सुबह बाजार खुलते ही एक्सॉन का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा गिर गया.

एथिक्स एक्सपर्ट्स ने बताया गलत

नैतिकता के जानकारों का मानना है कि भले ही राष्ट्रपति सीधे तौर पर ट्रेडिंग न कर रहे हों, लेकिन जब राष्ट्रपति के फैसलों से पूरी दुनिया का बाजार हिलता है, तब उनके निजी निवेश को लेकर सवाल उठना लाजिमी है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मैनेजर के हाथ में खाता सौंप देने से हितों का टकराव पूरी तरह खत्म नहीं होता, क्योंकि राष्ट्रपति को अपनी बड़ी होल्डिंग्स के बारे में पहले से पता होता है.

दूसरी ओर, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस मामले को लेकर तेवर सख्त कर लिए हैं. कांग्रेस की संयुक्त आर्थिक समिति के डेमोक्रेटिक सदस्यों का अनुमान है कि ट्रंप के पूरे तेल पोर्टफोलियो में इस साल 1.55 करोड़ डॉलर तक की बढ़ोतरी हुई है. सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन समेत कई नेताओं ने कहा है कि अगर वे नवंबर के मिडटर्म चुनावों में जीतते हैं, तो इन सौदों और कारोबारी हितों की आधिकारिक जांच कराई जा सकती है.

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