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​Coal India ने तेज की कोयला सप्लाई, 40% बढ़ा उत्पादन, बिजली घरों को मिली बड़ी राहत

देश के कई राज्यों में गहराते बिजली संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने बिजली घरों को होने वाली कोयले की सप्लाई में बड़ा इजाफा किया है. बारिश कम होते ही 8 सितंबर को कंपनी का कुल कोयला उत्पादन बढ़कर 1.91 मिलियन टन पर पहुंच गया. ये आंकड़ा सितंबर के शुरुआती तीन दिनों के रोजाना के औसत से करीब 40 फीसदी ज्यादा है.

​Coal India ने तेज की कोयला सप्लाई, 40% बढ़ा उत्पादन, बिजली घरों को मिली बड़ी राहत

उत्पादन बढ़ने का सीधा फायदा देश के थर्मल पावर प्लांट्स को हुआ है. बिजली क्षेत्र को की जाने वाली कोयले की सप्लाई 27 फीसदी बढ़कर 1.74 मिलियन टन प्रतिदिन दर्ज की गई, जो महीने के शुरुआती दिनों में सिर्फ 1.37 मिलियन टन थी. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रिपोर्ट्स में 58 थर्मल प्लांट्स के पास कोयले का स्टॉक बेहद कम होने की बात कही गई थी, जिससे बिजली उत्पादन ठप होने का खतरा मंडराने लगा था.

खदानों से तेजी से निकाला जा रहा पानी

कोल इंडिया के इस सुधार में उसकी सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का सबसे बड़ा रोल रहा. NCL ने 8 सितंबर को अकेले 3 लाख टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि महीने की शुरुआत में ये रोजाना महज 1.8 लाख टन ही था. भारी बारिश की वजह से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित NCL की खदानें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई थीं.

कंपनी के मुताबिक, मॉनसून कमजोर पड़ने के साथ ही खदानों में जमा पानी को निकालने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया. अंदरूनी सड़कों को तुरंत ठीक किया गया, ताकि कोयले को लोडिंग प्लांट्स और रेलवे साइडिंग्स तक तेजी से पहुंचाया जा सके. NCL का 87 फीसदी कोयला बिजली घरों को ही जाता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्लांट मुख्य रूप से शामिल हैं. चालू वित्त वर्ष में 8 सितंबर तक NCL का कुल उत्पादन 51.43 मिलियन टन और कुल सप्लाई 55 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है.

देश में 51 दिनों का स्टॉक मौजूद

बिजली संकट की चिंताओं के बीच केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्थिति साफ की है. उन्होंने बताया कि देश में खदानों, रास्ते और पावर प्लांट्स को मिलाकर कुल 123 मिलियन टन से ज्यादा कोयला उपलब्ध है. ये स्टॉक देश की 51 दिनों की बिजली मांग को आसानी से पूरा करने के लिए काफी है.

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि लगभग 100 मिलियन टन कोयला खदानों के पास या ढुलाई के रास्ते में है, जबकि थर्मल पावर प्लांट्स के पास खुद 23.7 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसेजैसे बारिश पूरी तरह थमेगी, उत्पादन और सप्लाई दोनों प्रीमॉनसून स्तर पर लौट आएंगे.

कमजोर मॉनसून बना बिजली किल्लत की वजह

इस साल कोयला खदानों और बिजली कंपनियों पर दबाव की एक खास वजह कमजोर मॉनसून और अल नीनो की स्थिति भी रही है. कम बारिश के चलते खेतों में सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल चलाने पड़े, जिससे कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई. वहीं, उमस भरी गर्मी के कारण घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल लगातार बढ़ता गया.

आमतौर पर कोयला आधारित बिजली की कमी को पूरा करने वाला हाइड्रो पावर सेक्टर भी इस बार कम बारिश के चलते पिछड़ गया. ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में बिजली की कमी सबसे ज्यादा देखी गई. रविवार को देश में बिजली की कमी 19.57 मिलियन यूनिट रही, जबकि 5 सितंबर को ये आंकड़ा 28 मिलियन यूनिट को पार कर गया था.

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