
गलत खान-पान, लगातार बैठे रहने की आदत और तनाव के कारण पेट में गैस, एसिडिटी और ब्लॉटिंग (पेट फूलना) की समस्या आजकल आम हो गई है। कई लोग इससे तुरंत राहत पाने के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन रोजाना सही तरीके से योगाभ्यास करने से पाचन तंत्र को नेचुरल तरीके से दुरुस्त रखा जा सकता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ विशेष योगासन पेट के आंतरिक अंगों की हल्की मालिश करते हैं, जिससे पाचन अग्नि तीव्र होती है और रुकी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित योग शिक्षक वीरेंद्र कुमार ने बताया गलत लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधि की कमी, जल्दी-जल्दी खाना, कब्ज और कुछ खाद्य पदार्थों के कारण पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। कई बार गैस बनने के साथ पेट भारी और फूला हुआ महसूस होता है। योग और नियमित शारीरिक गतिविधि कुछ लोगों में पाचन संबंधी असहजता और ब्लोटिंग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। एक्सपर्ट ने पेट की गैस और पेट फूलने की समस्या के लिए पांच योगाभ्यास बताए हैं जिन्हें रोज करके आप आसानी से पेट की गैस का इलाज कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 3 योगासनों के बारे में और उन्हें करने की सही विधि।
वज्रासन कीजिए गैस और ब्लोटिंग में है मददगार
वज्रासन ये एक ऐसा आसान है जो खाना खाने के बाद थोड़ी देर करने से शरीर को आराम मिलता है और पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट मिल सकता है। इस मुद्रा में बैठने से पेट और पेल्विक क्षेत्र की स्थिति ऐसी रहती है कि कुछ लोगों को गैस पास होने में आसानी महसूस हो सकती है। भोजन के बाद कुछ देर वज्रासन में बैठना पेट के भारीपन और फुलाव की अनुभूति को कम करने में मददगार हो सकता है। तनाव और चिंता कुछ लोगों में गैस और पेट की परेशानी बढ़ा सकते हैं। धीमी सांसों के साथ वज्रासन करने से रिलैक्सेशन मिल सकता है।
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कैसे करें: घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें, रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें और सामान्य गति से सांस लें। शुरुआत में 5–10 मिनट बैठ सकते हैं। अगर घुटनों या टखनों में दर्द हो तो जबरदस्ती न करें।
मंडूकासन कीजिए
पेट में गैस और ब्लोटिंग से परेशान रहते हैं तो मंडूकासन कीजिए। मंडूकासन से पेट की समस्या में राहत मिलती है। मंडूकासन (Mandukasana) करने के लिए वज्रासन की मुद्रा में बैठकर पेट के हिस्से पर हाथों से हल्का दबाव डालते हुए आगे की ओर झुकता है। योग प्रशिक्षक के अनुसार, इस अभ्यास से पेट के आसपास के हिस्से पर दबाव पड़ता है और गैस पास होने में मदद मिल सकती है।
पैरों से करें साइकिलिंग एक्सरसाइज
इसे करने के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को साइकिल चलाने जैसी मुद्रा में चलाने की सलाह दी गई है। इसमें पैरों को आगे और पीछे की दिशा में घुमाया जाता है। यह एक तरह की हल्की शारीरिक गतिविधि है, जिससे पेट और पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है। नियमित शारीरिक गतिविधि पाचन और आंतों की सामान्य गतिविधियों को सपोर्ट कर सकती है तथा कुछ लोगों में कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्या में राहत दे सकती है।
पेट को अंदर खींचने वाला अभ्यास
पैरों को पकड़कर शरीर को सिकोड़ने और पेट को अंदर की ओर खींचने वाला अभ्यास करें। इस तरह की मुद्रा में पेट और जांघों के बीच हल्का दबाव बनता है। योग प्रशिक्षक के अनुसार इससे पेट में फंसी गैस को बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे करते समय सांस रोकने या पेट पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचना चाहिए।
पवनमुक्तासन गैस और ब्लोटिंग में हो सकता है मददगार
पांचवें अभ्यास के रूप में पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) बताया गया है। इसमें पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को पेट की ओर लाया जाता है और हाथों से उन्हें पकड़कर शरीर की तरफ खींचा जाता है। इस मुद्रा में पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है और गैस पास होने में आसानी महसूस हो सकती है। इसी वजह से इसे पारंपरिक योग अभ्यासों में पाचन संबंधी असहजता और पेट फूलने के लिए किया जाता है।
गैस की समस्या में योग के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
सिर्फ योगासन पर निर्भर रहने के बजाय गैस और ब्लोटिंग के कारणों पर ध्यान देना भी जरूरी है। भोजन धीरे-धीरे चबाकर खाएं, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित शारीरिक गतिविधि करें और ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान करें जिनसे आपको बार-बार गैस या पेट फूलने की समस्या होती है। अगर पेट फूलना या गैस लगातार बनी रहती है, तो इसके पीछे कब्ज, लैक्टोज इन्टॉलरेंस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या दूसरी पाचन संबंधी समस्या भी हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और योग संबंधी जागरूकता के लिए है। योगासन कुछ लोगों में गैस, ब्लोटिंग या पाचन संबंधी असहजता को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। योगासन सही तकनीक और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें। लगातार गैस, तेज पेट दर्द, उल्टी, मल में खून, बिना वजह वजन कम होना या अन्य गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।



