
बाबा के महासमाधि दिवस पर यूपीएसटीडीसी ने शुरू किए पांच विशेष टूर पैकेज
दिल्लीलखनऊ से 2, 3 और 5 दिन की यात्रा, स्थलों के विकास पर 12.93 करोड़ खर्च
लखनऊ, अमृत विचार: श्रद्धेय संत नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक विरासत को देशदुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बाबा के जीवन और साधना से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़कर ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ विकसित किया जा रहा है। महासमाधि दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने श्रद्धालुओं के लिए बाबा के नाम से पांच विशेष टूर पैकेज भी शुरू किए हैं। दिल्ली और लखनऊ से संचालित होने वाले इन पैकेजों में दो, तीन और पांच दिन की यात्राएं शामिल हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि नीब करोरी बाबा की आस्था, सादगी और सेवा की विरासत आज भी देशविदेश के लोगों को प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बाबा से जुड़े स्थलों को संरक्षित करने के साथ उनकी पर्यटन क्षमता विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
फिरोजाबाद के अकबरपुर को बाबा नीब करोरी की जन्मस्थली के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के पहले चरण में पर्यटन सुविधाओं पर 8.65 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। दूसरे चरण की 2.22 करोड़ रुपये की परियोजना का 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अकबरपुर में 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी जल्द शुरू की जाएगी।
फर्रुखाबाद स्थित नीब करोरी आश्रम के विकास की 1.51 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी हो चुकी है। यहां यात्रियों के ठहरने के लिए भवन, मुख्य द्वार और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। अकबरपुर में बहुद्देशीय सभागार, सांस्कृतिक ब्लॉक, बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी हॉल, डाइनिंग हॉल, 50 क्षमता की कैफेटेरिया, रसोई, शौचालय और करीब 60 लोगों के ठहरने के लिए डॉरमेट्री विकसित की जा रही है।
इनसेट
जन्मस्थली से महासमाधि स्थल तक जुड़ेगा सफर
‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ में वृंदावन स्थित समाधि मंदिर, फिरोजाबाद का अकबरपुर गांव, फर्रुखाबाद का नीब करोरी बाबा आश्रम धाम मंदिर और लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर शामिल हैं। इस तरह बाबा की जन्मस्थली से लेकर साधना स्थल और महासमाधि स्थल तक जुड़े प्रमुख स्थानों को एक पर्यटन मार्ग में लाने का प्रयास किया जा रहा है।



