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​UP: 4 शहर, 4 मस्जिद और 4 विवाद… सहारनपुर से मेरठ तक क्यों उठे सवाल? जानें पूरी कहानी

Meerut/Saharanpur/Sambhal/Moradabad: “कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ होती है, लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं. नजर फेरनी है तो फेर लो, लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते.” AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ये बयान सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के बाद दिया था, लेकिन उनको क्या पता था कि ये मामला सहारनपुर से निकलकर मुरादाबाद और संभल होते हुए मेरठ तक पहुंच जाएगा. सहारनपुर में मस्जिद गिराई गई, मुरादाबाद में मस्जिद को नोटिस दिया गया, संभल में एएसआई का सर्वे हुआ और अब मेरठ में शाही जामा मस्जिद पर ASI सर्वे करवाने की मांग उठी है.

​UP: 4 शहर, 4 मस्जिद और 4 विवाद… सहारनपुर से मेरठ तक क्यों उठे सवाल? जानें पूरी कहानी

पश्चिमी यूपी में 4 मस्जिदें, 4 अलगअलग विवाद

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चार मस्जिदें और चार अलगअलग विवाद हैं, लेकिन सवाल एक है क्या ये सिर्फ जमीन और कानूनी प्रक्रिया के मामले हैं या इनके पीछे कोई बड़ा धार्मिक विवाद आकार ले रहा है? इन मामलों की टाइमिंग भी अहम है. कुछ महीनों में यूपी में चुनाव होने हैं. सरकार के विरोधी इन मामलों के जरिए सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा रहे हैं. इस बीच सहारनपुर का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है.

सहारनपुर में मस्जिद गिराई जा चुकी है. मुरादाबाद में बुलडोजर का अल्टीमेटम दिया गया है. संभल में ASI जांच के लिए पहुंच चुकी है और मेरठ में एक वकील ने शाही जामा मस्जिद के ASI सर्वे की मांग कर दी है. तो आखिर वेस्ट यूपी में एक साथ इतने मस्जिद विवाद क्यों उठ रहे हैं? आइए, एकएक करके पूरे मामले को तथ्यों के साथ समझते हैं…

सहारनपुर में मस्जिद गिराई गई

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर बीते शनिवार को आधा दर्जन से अधिक बुलडोजर द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. करीब 28 घंटे चली कार्रवाई के बाद पूरी मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया. इसके बाद उसके मलबे को सहारनपुर शहर से दूर फेंक दिया गया. अब इस मस्जिद का मामला अदालत में पहुंच गया है. मस्जिद कमेटी की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिला प्रशासन ने बिना कानूनी नोटिस और ध्वस्तीकरण आदेश के कार्रवाई की है. इसके साथ ही पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है.

डेढ़ साल से चल रहा था विवाद

यह विवाद पिछले डेढ़ साल से चल रहा था. सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानकर मस्जिद को अवैध घोषित किया था. इसके साथ ही 6.41 करोड़ रुपए से अधिक की क्षतिपूर्ति लगाई गई थी और मस्जिद के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे. मुस्लिम पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय का रुख किया था. जिला एवं सत्र न्यायालय ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर स्टे दिया था. इसके बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से किए गए दावे को खारिज कर दिया गया. फिर प्रशासन की ओर से मस्जिद को लेकर कार्रवाई की गई और करीब 28 घंटे के अंदर मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा मामला

इस कार्रवाई के बाद लगातार सियासी बवाल मचा हुआ था. वहीं मुस्लिम समाज में भी नाराजगी थी. ऐसे में मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इसमें जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और वक्फ बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है. इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है.

वहीं, हाल ही में दिल्ली से जमीयत उलेमाएहिंद ने भी इस मामले में हाई कोर्ट जाने की बात कही थी. जमीयत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हालात का जायजा लेने सहारनपुर पहुंचा था. प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद और सपा नेता हाजी फजलुर्रहमान और केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट नौशाद अली से मुलाकात की थी.

मुरादाबाद में मुस्तफा मस्जिद पर बुलडोजर का खतरा

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद पर बुलडोजर चलने के बाद अब मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद पर भी बुलडोजर का खतरा मंडरा रहा है. लखनऊदिल्ली हाईवे के किनारे यह मस्जिद एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के फ्रंट पर है. इसे हटाने के लिए पिछले काफी समय से कोशिशें की जा रही थीं. अब मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने करीब 300 वर्ग मीटर एरिया में बनी इस मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है.

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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के विहित अधिकारी की ओर से मुस्तफा मस्जिद के प्रबंधक को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत नोटिस भेजा गया है. इस धारा के तहत प्राधिकरण अवैध बताए गए निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई करता है. मस्जिद के प्रबंधक को यह नोटिस एमडीए की ओर से 21 अगस्त 2026 को जारी किया गया था.

एमडीए ने निर्माण की अनुमति पर उठाए सवाल

नोटिस में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14 और धारा 15 के आदेशानुसार विकास प्राधिकरण की अनुमति प्राप्त किए बिना मस्जिद का निर्माण किया गया है. नोटिस में एमडीए अधिकारियों ने कहा है कि जोन1, एसजेड1, मोहल्ला ईदगाह, दिल्ली रोड, टीएमयू के पास पाकबड़ा में लगभग 300 वर्ग मीटर में मुस्तफा मस्जिद का निर्माण किया गया है, लेकिन एमडीए की टीम को स्वीकृति संबंधी कोई दस्तावेज मौके पर नहीं दिखाया गया.

नोटिस की आखिरी लाइन में कहा गया था कि मस्जिद के प्रबंधक मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष 3 सितंबर 2026 को दोपहर एक बजे तक यह बताएं कि इस अवैध निर्माण को गिराने के आदेश क्यों न दिए जाएं? अब इस तारीख को बढ़ाकर 25 सितंबर कर दिया गया है. इसी दिन मस्जिद पक्ष अपने दस्तावेज दाखिल करेगा.

मस्जिद प्रबंधन का दावा 60 साल पुरानी है मस्जिद

दूसरी तरफ मस्जिद के इमाम मोहम्मद शान अजहरी और प्रबंधन समिति का स्पष्ट कहना है कि यह कोई नया निर्माण नहीं है, बल्कि करीब 60 साल पुरानी मस्जिद है. उनका कहना है कि यहां वर्षों से बड़ी संख्या में लोग इबादत के लिए इकट्ठा होते हैं और इससे मुख्य मार्ग के यातायात में भी कोई बाधा नहीं पहुंचती है.

मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि स्थानीय लोगों की गहरी आस्था से जुड़े इस विषय पर नोटिस का औपचारिक जवाब तैयार किया जा रहा है. जरूरत महसूस होने पर कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा. उनका कहना है कि टीएमयू यूनिवर्सिटी के फ्रंट से सटी यह मुस्तफा मस्जिद कई दशक पुरानी है. हालांकि, एमडीए ने अपने नोटिस में इस अनाधिकृत निर्माण के शुरू होने की तारीख 20 अगस्त 2026 दर्ज कर रखी है.

संभल में भी मस्जिद को लेकर विवाद

संभल में भी एक मस्जिद को लेकर विवाद शुरू हो गया है. बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद के नाम से मशहूर इस मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया गया है. इस संबंध में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी सारे हथकंडे अपना रही है. संजय सिंह ने लिखा है कि बीजेपी यूपी का चुनाव बुरी तरह हार रही है, इसी कारण दंगा कराने की साजिश रच रही है. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए हिंदू भाइयों से आगे आने की अपील भी की. संजय सिंह ने सहारनपुर की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आदेश सीलिंग का था, लेकिन योगी सरकार द्वारा मस्जिद तोड़ दी गई. इसके बाद उन्होंने संभल में हो रही कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा.

ASI ने मुसाफिरखाने का किया निरीक्षण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के सर्वेक्षण सहायक अधिकारी पुनीत डोगरा ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हसनपुर मार्ग पर बने जामा मस्जिद के मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया. आरोप यह है कि यह मुसाफिरखाना जामा मस्जिद के नाम दर्ज जमीन पर बना हुआ है, जबकि जामा मस्जिद की संपत्ति ASI के संरक्षण में है.

यह मुसाफिरखाना करीब एक बीघा जमीन पर 1994 में बना था और वर्तमान में इसकी देखरेख जामा मस्जिद के सदर जफर अली कर रहे हैं. टीम ने मुसाफिरखाने के भवन का निरीक्षण करते हुए उसके आसपास की जमीन को भी देखा. मुसाफिरखाने के अंदर जाकर फोटो और वीडियो भी बनाए गए. इसके बाद SDM ऑफिस में करीब आधे घंटे तक इस जमीन से जुड़े कागजात भी देखे गए.

शिकायत के बाद पहुंची ASI टीम

यह शिकायत श्रीकल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी ने 31 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल से की थी. उनका कहना था कि ASI संरक्षित इमारत हरिहर मंदिर/जामा मस्जिद के नाम से अन्य संपत्तियां भी दर्ज हैं. शिकायत में दावा किया गया कि ASI संरक्षित होने के बावजूद 1415 वर्ष पूर्व इसकी संपत्ति पर बाबा बहाउद्दीन शाह नाम से मस्जिद बनाकर कब्जा कर लिया गया.

शिकायत पत्र में वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी के विरोध में हुई हिंसा में भी मस्जिद से जुड़े लोगों की भूमिका का आरोप लगाया गया. इसी शिकायतकर्ता ने 7 सितंबर को दिए दूसरे प्रार्थना पत्र में मुसाफिरखाना को भी जामा मस्जिद की जमीन पर बने होने का आरोप लगाया था. हालांकि, मंगलवार को ASI की टीम ने मुसाफिरखाने का ही निरीक्षण किया. बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को टीम ने नहीं देखा.

मेरठ में शाही जामा मस्जिद के सर्वे की मांग

मेरठ में भी एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कोतवाली क्षेत्र स्थित शाही जामा मस्जिद के पुरातात्विक स्वरूप की जांच कराने की मांग उठी है. जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी और डीएम को ज्ञापन देकर मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वे और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है. मामले को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने DM को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

मस्जिद के नीचे प्राचीन ढांचे का दावा

अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने अपने प्रार्थनापत्र में दावा किया है कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ, विहार अथवा अन्य पुरातात्विक संरचनाएं मौजूद हो सकती हैं. उन्होंने इस दावे के समर्थन में ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने विवरणों का हवाला देते हुए पूरे परिसर का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराने की मांग की है. फिलहाल यह एक दावा है और इसकी पुष्टि वैज्ञानिक या पुरातात्विक जांच के बाद ही हो सकती है.

चारों मामलों की टाइमिंग पर सवाल

जिस तरह से ये चारों मामले एक ही समय में सामने आए हैं, उनकी टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं. इनका असर सिर्फ अदालत या प्रशासन तक सीमित नहीं रहकर सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है. खासकर यूपी में चुनावी माहौल बनने के साथ यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि ये महज एक संयोग है या कोई प्रयोग?

हालांकि, चारों मामलों की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलगअलग है. सहारनपुर में कार्रवाई के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है. मुरादाबाद में मस्जिद प्रबंधन को दस्तावेज पेश करने का समय दिया गया है. संभल में ASI की ओर से संपत्ति और मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया गया है, जबकि मेरठ में शाही जामा मस्जिद के ASI सर्वे की मांग पर प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं. अब इन मामलों में आगे की कार्रवाई और संबंधित संस्थाओं के फैसले से ही साफ होगा कि विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है.

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