उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी वक्त है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. बीजेपी ने इस बार चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया को संगठन के सबसे अहम हथियारों में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी का फोकस सिर्फ अपनी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सोशल मीडिया पर प्रचारित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने और खुद अपना नैरेटिव सेट करने पर भी रहेगा.

गुरुवार को लखनऊ स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में सोशल मीडिया विभाग की प्रदेश कार्यशाला हुई. इसमें प्रदेश से लेकर क्षेत्र और जिला स्तर तक के सोशल मीडिया पदाधिकारियों ने डिजिटल रणनीति को लेकर मंथन किया. कार्यशाला में साफ संदेश दिया गया कि 2027 के चुनाव में बीजेपी को नैरेटिव फॉलोअर नहीं, बल्कि नैरेटिव सेटर बनना है.
नैरेटिव फॉलोअर नहीं, नैरेटिव सेटर
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहने को कहा. उन्होंने कहा कि विपक्ष झूठ, फरेब और अफवाहों के जरिए नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करता है और बीजेपी कार्यकर्ताओं को इसका जवाब सत्य और तथ्यों के आधार पर देना होगा. पार्टी की रणनीति को बूथ स्तर के संगठन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह बीजेपी विधानसभा चुनाव के लिए बूथ से लेकर हर घर तक अपनी पहुंच मजबूत कर रही है, उसी तरह सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर भी संगठन की प्रभावी मौजूदगी होनी चाहिए.
बूथ तक पहुंचेगा डिजिटल नेटवर्क
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने भी सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को विपक्ष के कथित झूठे नैरेटिव का तत्काल जवाब देने के लिए तैयार रहने को कहा. उनका फोकस क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम पर रहा. यानी सोशल मीडिया पर जैसे ही कोई मुद्दा या विपक्ष का कोई आरोप तेजी से फैलता है, बीजेपी की तरफ से उसका जवाब देने में देरी न हो.
इसके लिए जिला स्तर से लेकर निचले संगठनात्मक स्तर तक ऐसी टीमों की जरूरत बताई गई जो तेजी से कंटेंट तैयार कर उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचा सकें. इस रणनीति में सोशल मीडिया को सिर्फ मैसेज ब्रॉडकास्ट करने वाला प्लेटफॉर्म न बनाकर जनता से लगातार संवाद का माध्यम बनाने पर भी जोर दिया गया.
सरकार की योजनाओं को डिजिटल हथियार बनाएगी BJP
बीजेपी की डिजिटल रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा योगी और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार है. पार्टी स्थानीय विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के अनुभव और बीजेपी के संगठनात्मक कार्यक्रमों को सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. यानी अब सिर्फ यह बताने के बजाय कि सरकार ने कौन सी योजना शुरू की, पार्टी यह दिखाने की कोशिश करेगी कि योजना का फायदा किसे मिला और जमीन पर उसका असर क्या हुआ. स्थानीय स्तर के कंटेंट को भी इसी वजह से खास महत्व दिया जा रहा है.
युवाओं पर सबसे बड़ा दांव
बीजेपी के डिजिटल प्लान में युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रखी गई है. राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हस्के ने कार्यकर्ताओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय और मुखर रहने की अपील की. साथ ही बड़ी संख्या में युवाओं को सोशल मीडिया नेटवर्क से जोड़कर पार्टी की विचारधारा और कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया गया. युवाओं को पार्टी के डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बनाकर उन्हें ‘साइबर योद्धा’ के तौर पर तैयार करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई. यानी 2027 के चुनाव में बीजेपी का डिजिटल संगठन एक तरह से पार्टी के जमीनी संगठन का ऑनलाइन विस्तार होगा.
हर प्लेटफॉर्म के लिए अलग रणनीति
राष्ट्रीय सह संयोजक शिवानंद द्विवेदी ने सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप और अलगअलग डिजिटल प्लेटफॉर्म की प्रकृति पर पदाधिकारियों से संवाद किया. क्योंकि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और दूसरे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट का असर अलगअलग तरीके से होता है. बीजेपी अब इसी हिसाब से कंटेंट तैयार करने और उसे सही ऑडियंस तक पहुंचाने पर फोकस कर रही है. मतलब साफ है कि एक ही कंटेंट को हर जगह डालने के बजाय प्लेटफॉर्म के हिसाब से डिजिटल रणनीति बनाने की तैयारी है.
BJP का डिजिटल मॉडल: कंटेंट + नेटवर्क + क्विक रिस्पॉन्स
अगर बीजेपी की इस पूरी कवायद को तीन हिस्सों में समझें तो पार्टी का डिजिटल मॉडल कुछ ऐसा नजर आता है—
पहला कंटेंट: सरकार की योजनाएं, उपलब्धियां और स्थानीय विकास.
दूसरा नेटवर्क: प्रदेश से लेकर जिला और बूथ स्तर तक सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की टीम.
तीसरा क्विक रिस्पॉन्स: विपक्ष के आरोप या किसी वायरल मुद्दे पर तत्काल तथ्यात्मक जवाब.
यानी पार्टी अब सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि नैरेटिव बनाने और नैरेटिव की लड़ाई लड़ने वाला संगठनात्मक मोर्चा बनाना चाहती है.
2027 के चुनाव में क्यों अहम है डिजिटल मोर्चा?
उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला सिर्फ रैलियों, बूथ मैनेजमेंट और जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रह गया है. सोशल मीडिया पर बनने वाली धारणा भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती है. इसी को देखते हुए बीजेपी 2027 से काफी पहले अपना डिजिटल नेटवर्क मजबूत करने में जुट गई है. पार्टी की कोशिश है कि चुनाव के वक्त उसके पास सिर्फ बड़े नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट न हों, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं की ऐसी डिजिटल फौज हो जो स्थानीय मुद्दों पर तुरंत सक्रिय हो सके. दूसरी तरफ विपक्ष के आरोपों और वायरल दावों का जवाब देने के लिए क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार करने की कवायद भी इसी रणनीति का हिस्सा है.
कार्यशाला से साफ हुआ BJP का 2027 डिजिटल एजेंडा
लखनऊ की इस कार्यशाला से बीजेपी का 2027 का डिजिटल एजेंडा काफी हद तक साफ हो गया है. पार्टी बूथ से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक संगठन का विस्तार, सरकारी योजनाओं का प्रचार, युवाओं को जोड़ना और विपक्ष के नैरेटिव का तत्काल जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है, लेकिन इस पूरी रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण लाइन वही है जो प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं को दी नैरेटिव फॉलोअर नहीं, नैरेटिव सेटर बनना है.


