शिमला : हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी सड़कों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मंडीकुल्लू और आगे मनाली व लेहलद्दाख जाने वाले लोगों की यात्रा अब पहले से तेज और सुरक्षित होने जा रही है। NH03 के पंडोहटकोली सेक्शन में बनी देओद और हनोगी सुरंगें 11 सितंबर 2026 से ट्रैफिक के लिए खोल दी जाएंगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी है। दोनों सुरंगों के शुरू होने से यात्रियों को खतरनाक मोड़ों, जाम और भूस्खलन प्रभावित हिस्सों से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
मंडी से कुल्लू पहुंचने में लगेगा करीब 1 घंटा
नई सुरंगों के चालू होने के बाद मंडी से कुल्लू का सफर करीब 2 घंटे से घटकर लगभग 1 घंटे का हो सकता है। पर्यटन सीजन में इस मार्ग पर लगने वाले लंबे जाम के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती थी।
इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 6 किलोमीटर के घुमावदार और संवेदनशील पहाड़ी हिस्से को बायपास किया गया है। अब यात्रियों को लगभग 3.5 किलोमीटर का छोटा और अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग मिलेगा।
कितनी लंबी हैं दोनों सुरंगें?
- देओद सुरंग : 2.8 किलोमीटर
- हनोगी सुरंग : 650 मीटर
जाम और लैंडस्लाइड से मिलेगी राहत
जोगनी माता मंदिर, देओद और हनोगी के आसपास पर्यटन सीजन में अक्सर लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। कई बार वाहनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा पंडोह और हनोगी क्षेत्र में भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा भी बना रहता है।
नई सुरंगों से इन संवेदनशील हिस्सों को बायपास किया जा सकेगा। इससे यात्रा का समय कम होने के साथसाथ सड़क सुरक्षा में भी सुधार की उम्मीद है।
मनाली से लेकर लद्दाख तक सफर होगा आसान
इस मार्ग का महत्व सिर्फ मंडी और कुल्लू तक सीमित नहीं है। मनाली, रोहतांग, लाहौलस्पीति और लेहलद्दाख जाने वाले यात्रियों को भी इसका फायदा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रणनीतिक रूप से भी यह सड़क महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे लद्दाख की ओर जाने वाले सैन्य काफिलों के लिए अधिक तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकती है।
₹4,466 करोड़ का है प्रोजेक्ट
देओद और हनोगी सुरंगें पंडोह बाईपासटकोली 4लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। करीब 18.9 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग ₹4,465.94 करोड़ है और इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मोड के तहत किया गया है।
इन सुरंगों के खुलने के बाद हिमाचल के इस महत्वपूर्ण हाईवे पर सफर पहले के मुकाबले तेज, छोटा और सुरक्षित होने की उम्मीद है।



