
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद उसका पति शव को स्ट्रेचर पर रखकर मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में बैठा रहा। उसके पास शव को घर ले जाने के लिए पैसे नहीं थे।
बारिश के बीच पति काफी देर तक मदद का इंतजार करता रहा। वहीं उसकी करीब 8 साल की बेटी अपनी मां के शव के पास बैठकर रोती रही। परिवार की हालत देखकर मेडिकल कॉलेज के एक पुलिसकर्मी ने पहल की और एंबुलेंस की व्यवस्था कराकर महिला का शव उसके घर भिजवाया।
इलाज के लिए ओरछा से झांसी आया था परिवार
जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के ओरछा निवासी राहुल आदिवासी अपनी पत्नी रामवती का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। रामवती की तबीयत गंभीर होने के बाद उन्हें झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
राहुल के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसके बावजूद डॉक्टर ने पैसे देकर टैक्सी की व्यवस्था कराई, जिसके बाद वह अपनी पत्नी और करीब 8 साल की बेटी नंदनी के साथ झांसी पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित किया
मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने रामवती को मृत घोषित कर दिया। पत्नी की मौत के बाद राहुल के सामने अब शव को वापस घर ले जाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई।
उसके पास शव को ले जाने के लिए वाहन का इंतजाम करने के पैसे नहीं थे। ऐसे में उसने पत्नी के शव को स्ट्रेचर पर रखा और मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में बैठकर मदद का इंतजार करने लगा।
बारिश में शव के पास बैठा रहा पति
राहुल काफी देर तक मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में स्ट्रेचर के पास बैठा रहा। एक तरफ पत्नी का शव था और दूसरी तरफ उसकी छोटी बेटी मां की मौत से बेहद परेशान थी।
नंदनी अपनी मां के शव के पास बैठकर रोती रही। परिवार के पास न तो शव को घर ले जाने के लिए पर्याप्त पैसे थे और न ही कोई निजी वाहन।
बताया गया कि बारिश के कारण हालात और भी मुश्किल हो गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि किसी तरह मदद मिल जाएगी और वे महिला के शव को अपने घर ले जा सकेंगे।
पुलिसकर्मी की नजर पड़ी तो हुई एंबुलेंस की व्यवस्था
कुछ देर बाद मेडिकल कॉलेज चौकी में तैनात सिपाही अजय की नजर पार्किंग में बैठे परिवार पर पड़ी। उसने स्थिति को समझने के बाद तत्काल मदद की कोशिश शुरू की।
सिपाही ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। इसके बाद रामवती के शव को एंबुलेंस के जरिए उनके घर भेजा गया।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच की बात कही
इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस सचिन माहौर ने बताया कि किसी मरीज की मौत के बाद परिजन शव वाहन की मांग करते हैं तो मेडिकल कॉलेज की ओर से वाहन उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने संभावना जताई कि डॉक्टरों ने शव परिजनों को सौंप दिया हो, लेकिन परिवार की ओर से शव वाहन की जरूरत के बारे में जानकारी नहीं दी गई हो। हालांकि, उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी अपने की मौत के बाद अंतिम संस्कार तक शव पहुंचाना भी कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है।



