सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद से जुड़े विवाद में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी को अंतरिम राहत दी है. हाईकोर्ट ने प्रशासन की ओर से लगाए गए ₹6 करोड़ 41 लाख के जुर्माने और हर्जाने की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी. मामला उस मस्जिद से जुड़ा है, जिसे प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश दिया था.

इसके बाद मामला जिला अदालत तक पहुंचा और फिर मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त कर दिया. जुलाई 2026 में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा माना था. अदालत ने मस्जिद कमेटी और कब्जेदारों से ₹6 करोड़ 41 लाख की रकम जुर्माने और हर्जाने के तौर पर वसूलने का आदेश दिया था. मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी थी.
5 सितंबर को 16 घंटे चला बुलडोजर
2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी. जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद 5 सितंबर 2026 को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करीब 16 घंटे तक कार्रवाई चली और मस्जिद को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया. इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी काफी विवाद हुआ. मुस्लिम पक्ष और विपक्षी नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए.
दावा किया कि मस्जिद काफी पुरानी थी और कमेटी को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया. प्रशासन का कहना था कि यह परिसर की पुरानी विश्रामशाला की जमीन थी, जिसे बिना अनुमति धार्मिक ढांचे में बदला गया, जबकि मस्जिद कमेटी का दावा था कि यह 100 साल से अधिक पुरानी और वक्फ में दर्ज संपत्ति है.
अब हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जिला अदालत के फैसले और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए फिलहाल ₹6.41 करोड़ की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी. यानी अभी कोर्ट ने मस्जिद को लेकर अंतिम फैसला नहीं दिया है, बल्कि फिलहाल आर्थिक वसूली वाले आदेश पर अंतरिम राहत दी गई है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी. मार्च 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की, जिसमें कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन पर बने इस ढांचे को अवैध बताया गया. आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट जैसे सरकारी परिसर की जमीन पर अवैध तरीके से धार्मिक ढांचा बनाया गया और मस्जिद की जमीन/परिसर से किराया वसूलने जैसी व्यावसायिक गतिविधियां भी की जा रही थीं.
प्रशासन ने इसी आधार पर जमीन के स्वामित्व और कथित अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई शुरू की. दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का दावा रहा है कि मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी थी और लंबे समय से वहां मौजूद थी. इसी आधार पर प्रशासन की कार्रवाई और प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए.



