
अमित कुमार पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचारः प्रदेश की सुरक्षा में डटे 75 हजार से ज्यादा होमगार्ड्स का ”भविष्य” अधर में है। उनकी भविष्य निधि की फाइल धूल फांक रही है। दस साल से कागजी कोरम चल रहे हैं लेकिन अभी तक उस पर निर्णय नहीं लिया जा सका है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का दावा है कि होमगार्ड्स को 1 अप्रैल 2015 से ईपीएफ कानून के तहत अनिवार्य कवरेज में लाया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक पीएफ लाभ का मामला सुलझ नहीं सका है। हालात यह हैं कि रिकॉर्ड मांगने पर भी विभाग से फाइलें बाहर नहीं निकल पा रहीं हैं। बारबार रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद भी जब फाइल ईपीएफओ नहीं पहुंची तो पांचपांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। बावजूद इसके फाइल कार्यालय तक नहीं पहुंच पाई है।
मामले में ईपीएफओ ने अप्रैल 2015 से दिसंबर 2024 तक की अवधि के लिए धारा 7 ए के तहत जांच शुरू की है। यह कार्यवाही 31 जनवरी 2025 से चल रही है। जांच का मकसद इस अवधि में पीएफ संबंधी देनदारी और अनुपालन की स्थिति तय करना है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्रीय समिति की 113वीं बैठक में कर्मचारी प्रतिनिधि ने यूपी होमगार्ड्स को पीएफ का लाभ न मिलने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद विभाग से स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई। लेकिन मामला आगे बढ़ने के बजाय रिकॉर्ड और कवरेज के पेच में फंसा है।
होमगार्ड विभाग का तर्क है कि प्रदेश में होमगार्ड्स के लिए ईपीएफ योजना के तहत कवरेज का कोई प्रावधान नहीं है। इस संबंध में प्रस्ताव कई बार शासन को भेजे जा चुके हैं। विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है। धारा 7 ए की जांच पर हजारों होमगार्ड्स की नजर है। दस साल से फंसे इस मामले में फैसला सिर्फ पीएफ का नहीं, बल्कि जवानों के बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा का भी है।
हमारा प्रयास है कि होमगार्ड्स जवानों का भविष्य सुरक्षित हो जिसके लिए जवानों को भविष्य निधि से जोड़ना चाहते हैं। विभाग को कई बार नोटिस देने के बाद भी अभी तक जवानों का कोई ब्यौरा प्राप्त नहीं हुआ है।
अश्विनी कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त
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