दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर देशों को एक साथ लाने वाले BRICS में अब अनाज की ट्रेडिंग के लिए एक नया प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी तेज हो गई है. नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS समिट में BRICS ग्रेन एक्सचेंज यानी ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज बनाने की रूस की पहल को न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन में जगह दी गई है. घोषणापत्र में कहा गया है कि BRICS के भीतर एक ग्रेन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाने की पहल पर काम जारी रखने और इसके काम करने के तरीके पर आगे चर्चा का स्वागत किया जाता है.

रूस चाहता है कि BRICS ग्रेन एक्सचेंज को इस साल यानी 2026 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाए और 2027 में इसे पूरी तरह ऑपरेशनल किया जाए. इसका मकसद BRICS देशों के बीच अनाज की ट्रेडिंग बढ़ाना और मौजूदा ग्लोबल कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करना है. इसके अलावा इस ब्रिक्स समिट में एग्री को लेकर 4 नई पहल की शुरुआत की गई है. समिट से कृषि को लेकर 4 नई टर्म मिली हैं. आइए आपको डिटेल में ग्रेन एक्सचेंज और 4 पहलों के बारे में डिटेल से बताते हैं.
हर साल 23,890 करोड़ रुपये की बचत
BRICS Grain Exchange को लेकर रूस का सबसे बड़ा दावा इसकी लागत और ट्रेडिंग से जुड़ी बचत को लेकर है. रूस के मुताबिक, BRICS का अपना ग्रेन एक्सचेंज शुरू होने से सदस्य देश हर साल करीब 2.5 अरब डॉलर की बचत कर सकते हैं. यह पहल मौजूदा अमेरिकी फ्यूचर्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म CME के विकल्प के तौर पर देखी जा रही है. अक्टूबर 2025 में इस प्रस्ताव को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी. रूस ने BRICS देशों के सामने तर्क दिया था कि मौजूदा प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग में कुछ देशों के हितों के पक्ष में झुकाव हो सकता है. ऐसे में BRICS का अपना एक्सचेंज सदस्य देशों को अनाज की कीमत तय करने और ट्रेडिंग के लिए एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा सकता है.
सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रहेगा एक्सचेंज
न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन में ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज को सिर्फ गेहूं, चावल या दूसरे अनाजों की ट्रेडिंग तक सीमित रखने की बात नहीं है. घोषणापत्र में कहा गया है कि आगे चलकर इस प्लेटफॉर्म को दूसरे एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और कमोडिटीज तक भी बढ़ाया जा सकता है. इसका मतलब है कि शुरुआत अनाज से होने के बाद BRICS देश दूसरे एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और कमोडिटीज के लिए भी साझा ट्रेडिंग सिस्टम तैयार कर सकते हैं. इससे सदस्य देशों के बीच एग्रीकल्चर ट्रेड बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
फूड सिक्योरिटी पर BRICS का फोकस
BRICS डिक्लेरेशन में फूड सिक्योरिटी और खाद्य कीमतों में अचानक होने वाले उतारचढ़ाव को कम करने पर भी जोर दिया गया है. सदस्य देशों ने माना कि दुनिया में फूड प्राइस में तेज उतारचढ़ाव और सप्लाई क्राइसिस का सीधा असर आम लोगों के साथसाथ किसानों पर भी पड़ता है. घोषणापत्र में खाद्य कीमतों में अचानक बढ़ोतरी, सप्लाई क्राइसिस और फर्टिलाइजर की कमी जैसे मुद्दों से निपटने की जरूरत बताई गई है. इसके लिए नेशनल लेवल पर फूड रिजर्व, सूखा सहने वाली फसलों और बदलते मौसम के हिसाब से तैयार सीड सिस्टम को मजबूत करने की बात कही गई है.
फर्टिलाइजर सप्लाई पर नहीं बनी पूरी सहमति
BRICS देशों के बीच फर्टिलाइजर सप्लाई को लेकर भी चर्चा हुई. हालांकि, चीन की तरफ से भविष्य में किसी संभावित फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट बैन से BRICS देशों को छूट देने की प्रतिबद्धता पर सहमति नहीं बन सकी. इसी वजह से न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन में इस मुद्दे पर किसी ठोस व्यवस्था का ऐलान नहीं किया गया. घोषणापत्र में कहा गया कि फूड सिक्योरिटी और एग्रीकल्चर इनपुट की उपलब्धता से जुड़े नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी.
BRICS देशों के बीच एग्रीकल्चर ट्रेड बढ़ाने पर जोर
BRICS डिक्लेरेशन में एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और एग्रीकल्चर इनपुट के बीच आपसी ट्रेड को आसान बनाने की बात भी कही गई है. इसमें नॉनडिस्क्रिमिनेटरी सप्लाई चेन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. इसका मकसद BRICS देशों के बीच एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स की खरीदबिक्री को आसान बनाना है, ताकि किसी एक देश या क्षेत्र में सप्लाई रुकने की स्थिति में दूसरे सदस्य देशों से जरूरत पूरी की जा सके.
ब्रिक्स समिति से शुरू ये 4 पहल
- BRICS AGRIN की भी शुरुआत BRICS Summit में एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण पहल BRICS AGRIN को लेकर हुई. इसका पूरा नाम AgroInputs, Genetic Resources, and Information Network है. यह एक कोलैबोरेटिव, नॉनबाइंडिंग और फार्मरसेंट्रिक नेटवर्क होगा. इसका मकसद एग्रीकल्चर इनपुट, जेनेटिक रिसोर्स और एग्रीकल्चर से जुड़ी जानकारी को लेकर BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है. इस पहल को जून 2026 में इंदौर में हुई 16वीं BRICS Agriculture Ministers Meeting में आगे बढ़ाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, अभी यह नेटवर्क नॉनबाइंडिंग है, लेकिन भविष्य में इससे जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाकर इसे ज्यादा प्रभावी सिस्टम में बदला जा सकता है.
- किसानों के अधिकार पर ग्लोबल फोरम BRICS देशों ने Farmers’ Rights in Seed Systems को लेकर ग्लोबल फोरम शुरू करने का भी स्वागत किया है. इस फोरम का मकसद किसानों के सीड राइट्स से जुड़े साझा मुद्दों पर चर्चा करना, बेहतर पॉलिसी को बढ़ावा देना और एग्रीकल्चर तथा सीड सिस्टम से जुड़े पारंपरिक ज्ञान का रिकॉर्ड तैयार करना और उसे शेयर करना है. इससे खास तौर पर छोटे किसानों और पारंपरिक खेती से जुड़े ज्ञान को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
- एग्रोइकोलॉजी पर ब्रिक्स नेटवर्क घोषणापत्र में BRICS Network of Centres of Excellence on Agroecology and Regenerative Agriculture बनाने की बात भी कही गई है. इसका फोकस क्लाइमेट रेजिलिएंस और एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर होगा. Agroecology और Regenerative Agriculture जैसी तकनीकों के जरिए मिट्टी की क्वालिटी, पानी के इस्तेमाल और खेती की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा. बदलते मौसम और क्लाइमेट क्राइसिस के बीच यह पहल एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
- डिजिटल एग्रीकल्चर पर भी नेटवर्क बनेगा BRICS देशों ने डिजिटल एग्रीकल्चर के लिए भी नेटवर्क बनाने पर सहमति दी है. इसमें Agriculture के साथ Agroforestry, Fisheries और Aquaculture जैसे सेक्टर भी शामिल होंगे. डिजिटल एग्रीकल्चर के जरिए खेती में डेटा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बेहतर इन्फॉर्मेशन सिस्टम के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है. इससे किसानों को प्रोडक्शन, मौसम, मार्केट और सप्लाई से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
WTO में एग्रीकल्चर बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर
BRICS देशों ने World Trade Organization यानी WTO में एग्रीकल्चर से जुड़ी बातचीत को भी आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है. इसमें WTO Agreement on Agriculture के तहत लंबे समय से पेंडिंग मुद्दों पर प्रोग्रेस करने की बात कही गई है. BRICS ने ऐसा एग्रीकल्चर ट्रेड सिस्टम बनाने की जरूरत बताई जो फेयर, बैलेंस्ड और डेवलपमेंटओरिएंटेड हो. घोषणापत्र में कहा गया कि बदलती पॉलिसी और रेगुलेटरी बदलाव एग्रीकल्चर प्रोडक्शन, ट्रेड, फूड सिक्योरिटी और छोटे तथा फैमिली फार्मर्स की आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं.
यानी BRICS Grain Exchange सिर्फ अनाज की खरीदबिक्री का प्लेटफॉर्म नहीं होगा. इसके जरिए BRICS देश एग्रीकल्चर ट्रेड, फूड सिक्योरिटी, फर्टिलाइजर सप्लाई, सीड, डिजिटल एग्रीकल्चर और किसानों से जुड़े मुद्दों पर एक साझा सिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. अगर रूस की योजना के मुताबिक 2026 में इसका पायलट शुरू होता है और 2027 में यह पूरी तरह ऑपरेशनल होता है, तो BRICS देशों के एग्रीकल्चर ट्रेड के लिए यह एक नया ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन सकता है.


